*‼️हम तो डूबेंगे सनम!आपको भी।ले डूबेंगे‼️*😉
_*सचिन का धरना क़ामयाब तो होगा मगर सचिन धराशायी होंगे!*_👍
_*दूध फटने का ग़म उसे सताता है,*_
_*जिसे रसगुल्ले बनाना नहीं आता है*_🙋♂️
_*और गहलोत-वसुंधरा जानते हैं रसगुल्ले बनाना!*_🤪
*✒️सुरेन्द्र चतुर्वेदी*
*राजस्थान कांग्रेस और भाजपा में हर्ष और आक्रोश मिश्रित आंधी चल रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट आज धरने पर बैठ रहे हैं। उनसे नाराज़ कोंग्रेसियों में ख़ुशी की लहर है। वे मान कर चल रहे हैं कि सचिन का यह धरना आत्मघाती सिध्द होगा और वह पार्टी से बाहर हो जाएंगे। या तो ख़ुद या पार्टी द्वारा।*💯
*भारतीय जनता पार्टी के वसुंधरा विरोधी नेता ख़ुश हैं कि सचिन के हमले से वसुंधरा का चेहरा पार्टी हाई कमान की नज़र में दो कौड़ी का होगा और पहले से खुन्नस खाए हाई कमान को वसुंधरा विरोधी फ़ैसला लेने में तर्क संगत मदद मिलेगी।*😵💫
*वसुंधरा और गहलोत दोनों फ़िलहाल प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।दोनों ही वेट एंड वाच की रणनीति पर चल रहे हैं।*😇
*गहलोत के समर्थन में हाईकमान के कुछ शीर्ष नेता सामने आ रहे हैं मगर बिफरे हुए सचिन का कोई इलाज़ नहीं कर पा रहे।*😉
*सचिन धरना देकर ही दम लेंगे। उन्होंने सावधानी यह बरती है कि अपने समर्थक विधायकों और मन्त्रियों को धरने पर नहीं बुलाया है। शायद वह जानते थे कि यदि विधायकों या मन्त्रियों को बुलाया और वे नहीं आए तो उनकी बन्द मुठ्ठी खुल जाएगी। उनके प्रभाव का नाटक बिना सियासती दवाब के ख़त्म हो जाएगा।*🙋♂️
*सचिन की इस समझदारी पर मैं भी दाद दूंगा।यह तय था कि जो लोग विगत लंबी अवधि से सचिन के नाम का पट्टा गले में लटका कर घूम रहे थे वे सब सचिन के तो साथ थे मगर उनके लिए अपनी बलि देने को तैयार नहीं थे। वे कांग्रेस में रह कर तो उनके पीछे खड़े थे मगर उनके साथ किसी नए विकल्पों पर विचार करने को तैयार न थे न हैं।आप पार्टी! नई पार्टी या डूबने वाले जहाज की सवारी करने को शायद ही कोई विधायक या मंत्री उनके साथ हो।*😔
*यदि सचिन विधायकों का या मन्त्रियों को बुलवाते भी तो शायद ही कोई इक्का दुक्का पहुंचता। ख़ैर!भीड़ तो उनके समर्थन में आ ही रही है। भीड़ दिखाने के लिए तो मंत्री और विधायक भी पूरी मुस्तैदी से लगे हुए हैं।*👍
*ऐसे नेता जिनको पिछले चुनावों में सचिन की मेहरबानी से टिकिट मिला और जो जीत नहीं पाए । ताज़्जुब की बात है कि वे लोग भी धरने में शामिल होने को तैयार नहीं।ज़ाहिर है कि जब तक उनको लगा कि सचिन मुख्यमंत्री बन सकते हैं तब तक तो उनका जयकारा करते रहे मगर अब जब तय हो चुका है कि कांग्रेस में सचिन का भविष्य अधर झूल में है , कोई खुल कर उनका साथ नहीं दे रहा।*😨
*मित्रों! सचिन ने अपने गले में सांपों की माला पहन ली है। हाई कमान के कुछ नेता भले ही आज भी उनको धरने जैसा आत्म घाती हथियार देकर ख़ुश हो रहे हों मगर यह हथियार कोई खिलौना नहीं है,यह वे भी जानते हैं।*
*खड़गे ,रन्धावा , पवन खेड़ा, जय राम और भी कई नेता खुल के सचिन के साथ नहीं होने की मंशा ज़ाहिर कर चुके हैं। राजस्थान प्रभारी रन्धावा तो कह भी चुके हैं कि जब अमरेंद्र सिंह को पंजाब में हटाया जा रहा था तब उनका नाम मुख्यमंत्री के लिए तय हो चुका था मगर उनको नहीं बनाया गया फिर भी उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी।*🙋♂️
*अब जबकि सचिन को लग गया है कि मुख्यमंत्री बनना उनके लिए आकाश कुसुम है! हवाई क़िला है तो न खाएंगे न खाने देंगे!रायता ढोल कर ही दम लेंगे! हम तो डूबेंगे सनम आपको भी ले डूबेंगे! इन सभी जुमलों के साथ सचिन कांग्रेस की राजनीति में अंतिम सांसें ले रहे हैं।*💁♂️
*सचिन और गहलोत की इस लड़ाई का सियासी हलके में कई लोग मज़े ले रहे हैं। ख़ास तौर से भाजपा!आम पार्टी! बैनीवाल एंड हिज कंपनी! सब यह सोच कर ख़ुश हैं कि अगले चुनावों में कांग्रेस को हराने के लिए “सचिन-गहलोत महासंग्राम” ही काफ़ी होगा। उनके लिए उपजाऊ ज़मीन तैयार की जा रही है।*😉
*सचिन ने नासमझी में सब्र का बांध तोड़ दिया है और अब इसका खामियाज़ा वसुंधरा गहलोत के साथ साथ वो ख़ुद भी उठाएंगे।इसी सप्ताह उनकी सियासती आत्महत्या घोषित हो जाएगी।*😟
*आज सचिन का धरना क़ामयाब रहेगा। ‘भीड़’ जिसका कोई चेहरा नहीं होता।सिर्फ़ संख्या होती है धरने में पहुंचेगी। धरने के बाद सचिन की ग़लत फ़हमी दूर हो जाएगी। चुनावों तक उनका प्रभा मंडल ख़त्म हो जाएगा।*😫
*अभिमन्यु ख़ुद अपने ही चक्र में घिर गया है।बाहर निकलने का न तो उसके पास सलीक़ा है न तरीक़ा।*🫢
*दिल्ली में बैठे उनके सलाहकार नपुंसक हैं यह अहसास भी उनको इस धरने के साथ हो जाएगा।*😒
*गहलोत और वसुंधरा की राजनीतिक अस्मिता का जहां तक सवाल है दोनों ही परिपक्व राजनेता हैं। इस संकट का भी फ़ायदा उठा लेंगे। क्यों कि दोनों जानते हैं मेरा यह व्यंग्य।*😊
_*”दूध फटने के ग़म उसे सताता है,*_
_*जिसे रसगुल्ले बनाना नहीं आता है।”*_😇


