“पानी की बोतल से भी सस्ता बिक रहा गो-माता का दूध”: विधानसभा में गरजे शाहपुरा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा
✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 667171141*
जयपुर/शाहपुरा। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शाहपुरा-बनेड़ा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने पशुपालकों और देशी गो-वंश के संरक्षण को लेकर पुरजोर तरीके से आवाज उठाई। डॉ. बैरवा ने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि एक ओर हम गो-माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर उसे पालने वाला किसान आज बदहाली की कगार पर है।
महंगा चारा, सस्ता दूध: किसान के सामने संकट
विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने आंकड़ों के साथ सरकार के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि आज बाजार में पानी की बोतल दूध से महंगी बिक रही है। उन्होंने कहा:
”आज चारा 12 रुपये किलो, बांटा 30 रुपये और मक्का 14 रुपये किलो मिल रहा है। एक गरीब पशुपालक दिनभर मेहनत करता है, लेकिन उसे दूध की वह कीमत भी नहीं मिल रही जिससे वह अपनी लागत निकाल सके। यही कारण है कि किसान अब गो-पालन से पीछे हट रहा है और गो-वंश निराश्रित घूमने को मजबूर है।”
50-60 रुपये प्रति लीटर करने की मांग
डॉ. बैरवा ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि यदि वास्तव में गो-माता का संरक्षण और संवर्धन करना है, तो सबसे पहले उसके ‘अमृत रूपी दूध’ की सही कीमत तय करनी होगी। उन्होंने सदन के माध्यम से सरकार से आग्रह किया कि डेयरी में देशी गाय के दूध की कीमत कम से कम 50 से 60 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की जानी चाहिए।
संरक्षण तभी संभव, जब पशुपालक होगा खुशहाल
विधायक ने स्पष्ट किया कि गो-वंश का संरक्षण केवल नारों से नहीं बल्कि आर्थिक मजबूती से होगा। जब किसान को दूध की अच्छी कीमत मिलेगी, तभी वह गो-पालन की ओर प्रेरित होगा और इससे प्रदेश का पशुपालक खुशहाली की ओर बढ़ेगा।


