*‼️अजमेर के रामसेतु को चूहों ने कुतर दिया‼️*😇
_*जाँच समिति को बताया चारू मित्तल ने!*_💁♂️
_*रिपोर्ट में पुल के निर्माण को बताया घटिया! बड़े हादसे की जताई आशंका!*_🫢
*✒️सुरेन्द्र चतुर्वेदी*
*अजमेर के एलिवेटेड रोड़ को लेकर अब कोई शक़ नहीं रहा कि उसका भविष्य फल ठीक नहीं। गिरना शत प्रतिशत तय है। बस! किसी उच्च स्तरीय जांच समिति की ज़रूरत है जो गिरने की अवधि का निर्धारण कर देगी। फ़िलहाल तो छोटी मोटी जांच समिति ने सप्ताह भर में बिना वैज्ञानिक जांच के ही फौरी तौर पर कह दिया है कि इस ब्रिज पर बनी सड़क के हाल ख़राब हैं और पूरी सड़क ख़तरे में है।*😳
*न जाने किस महान आत्मा ने क्या सोच कर इस एलीवेटेड रोड़ का नाम राम सेतु रख दिया। एक वो असली रामसेतु जो भगवान राम की वानर सेना ने सुग्रीव जैसे महान इंजीनियर्स की देख रेख में बनवाया था जो हज़ारों साल बाद भी अपनी मैज़ूदगी क़ायम रखे हुए है और एक ये जर्जर ढाँचा जो बनने के साथ ही गिरने के मूड में नज़र आ रहा है।*😱
*हाल ही दो चार दिन पहले गठित जाँच समिति ने अपनी रिपोर्ट देकर बता दिया है कि यह रामसेतु “राम नाम सत्य है” की अंतिम यात्रा पर निकल चुका है।*🫢
*एलिवेटेड रोड की एक भुजा पर सड़क धंसने के मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सोमवार को जिला प्रशासन को सौंप दी।*💁♂️
*यूडीएच मंत्री खर्रा और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी जी के आदेश पर गठित समिति के सदस्य नगर निगम के सी.ई. प्रेम शंकर शर्मा, पी डब्ल्यू डी के एस.ई.गिरिराज प्रसाद गुप्ता तथा ए डी ए एस. ई. शिशिर कांत ने प्राथमिक जांच में माना कि एलिवेटेड रोड का ड्रेनेज सिस्टम सही नहीं है ।*🙋♂️
*रिपोर्ट के अनुसार 2 जुलाई को हुई तेज़ बारिश के बाद एलिवेटेड सड़क के एक हिस्से में 5 फीट गहरी खोखली जगह बन गई । मिट्टी गिट्टी और सड़क का कोम्पक्शन प्रॉपर नहीं है, तथा जिओ टेक्सटाइल ग़ायब है। एलिवेटेड रोड में गुणवत्ता का अभाव है । एलिवेटेड के ऊपर लगाए गए डिवाइडर से ब्लॉक निकल रहे हैं। जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं। सड़क का ढ़लान सही नहीं होने से पानी जमा होता है। इसका कलर पेंट भी बदरंग हो गया है । ड्रेनज़ सिस्टम ख़राब होने से बरसात में एलिवेटेड रोड से नीचे पानी का झरना बहता है। कमेटी ने कहा है कि एलिवेटेड रोड निर्माण के दौरान मिट्टी गिट्टी और डामर की मात्रा प्रॉपर नहीं । नियमों के तहत कॉम्पेक्शन होता तो इस तरह मिट्टी नहीं निकल सकती थी। पानी निकासी के लिए फिल्टर मीडिया प्रॉपर नहीं था । रिवर्स फिल्टर में डाली गई गिट्टी का साइज़ भी छोटा है। 40 एम एम से अधिक के पत्थर लगाए जाने चाहिए थे। मिट्टी और गिट्टी के बहाव रोकने के लिए लगाई गई मेंब्रेन जिओ टेक्सटाइल गायब मिलीं। जहां नज़र आई उसमें गुणवत्ता नहीं थी । होल पानी निकासी के पाइप प्रॉपर डिजाइन के नहीं हैं। बरसाती पानी आने से बुड्ढा मिट्टी के साथ गिट्टी भी बह गईं। वीप होल के पीछे बड़े साइज से बड़े पत्थर लगाए जाने चाहिए थे। रिटर्निंग वॉल में लगाए गए वे वीप होल या तो ग़लत ऊंचाई पर बने हैं या आवश्यक जिओ टेक्सटाइल व फिल्टर मीडिया के अभाव में पूरी तरह काम नहीं कर रहे। इससे पानी के साथ सड़क के नीचे की मिट्टी और मिट्टी बहती रहती है ।*🤷♂️
*जांच कमेटी ने एलिवेटेड की निर्माण एजेंसी आरएसआरडीसी की चूहों द्वारा नुकसान पहुंचाने की थ्योरी को सिरे से ख़ारिज़ कर दिया। यदि चूहे एलिवेटेड रोड में घुस भी गए तो सड़क की कंक्रीट में छेद कैसे हुआ❓यदि चूहे कंक्रीट भी काट सकते हैं तो फिर तो कंक्रीट घटिया श्रेणी की है।*🤨
*आरएसआरडीसी की चारु मित्तल ने जांच अधिकारियों को बताया कि धंसी सड़क के लिए चूहे अधिक जिम्मेदार हैं।*🫢
*अब बेचारी चारू मित्तल जी के चूहों वाली थ्योरी को लेकर जांच समिति को कौन समझाए कि वास्तव में इस पूरे पुल को चूहों ने ही तो कुतरा है।*🤪
*स्मार्ट सिटी के निर्माण में जुटे हरामी चूहों ने ही इस पुल को कुतरा है।करोड़ों रुपये भी इन्हीं चूहों ने कुतरे।*😣
*जांच कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि एलिवेटेड रोड के बाकी हिस्सों में जल निकासी बाधित रही तो अन्य स्थानों पर भी सड़क का यही हाल होगा। किसी भी भयंकर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।*❌
*मित्रों! तीन साल पहले ही मैंने अपने ब्लॉग में यह जांच रिपोर्ट छाप दी थी। कल उस ब्लॉग को रिपीट करूंगा। देखिएगा कि मेरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कितनी सच्चाई थी।*👍


