*‼️कीड़े मारने की दवा में पड़े कीड़े‼️*💯
_*भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो ने रिश्वत लेते पकड़ा खुद का एडिशनल एसपी!*_😱
_*दो माह में दूसरी घटना!*_🫢
*✒️सुरेन्द्र चतुर्वेदी*
*कीड़े मारने की दवा में कीड़े पड़ रहे हैं! वेश्याएं करवा चौथ का व्रत रख रही हैं! खेत को बाढ़ खा रही हैं! भेड़ियों को भेड़ों की रक्षा करने का दायित्व मिला हुआ है! क़ातिल फ़ैसला सुना रहे हैं! ये सारे हेडिंग्स राजस्थान की पुलिस में देखने को मिल रहे हैं।*👍
*फिर एंटी करप्शन ब्यूरो ने हाल ही में निरीक्षण के दौरान अपने ही एडिशनल एस.पी. की गाड़ी में मिले 9 लाख 50 हजार रुपए ज़ब्त कर लिए। ए सी बी झालावाड़ के एडिशनल एसपी जगराम मीणा की गाड़ी से यह राशि मिली। आली जनाब एडिशनल एसपी मासिक बंधी के रूप में रुपए लेकर जयपुर लौट रहे थे। जनाबे आलि को हाल ही में भीलवाड़ा में अटैचमेंट किया गया था।अपने ही विभाग के कर्मचारी की सूचना पर ACB के ही एक अन्य एडिशनल एसपी पुष्पेन्द्र सिंह ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। ACB एडीजी स्मिता श्रीवास्तव के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई।*🙋♂️
*यहां बता दूं कि यह विभाग द्वारा की गई कोई पहली कार्यवाही नहीं है। इससे पहले भी ए सी बी अपने ही एक अन्य एडिशनल एस पी सुरेन्द्र शर्मा को रिश्वत खोरी के मामले में पकड़ा था। वह बंदा तो कमाल का रिश्वतखोर था। सवाईमाधोपुर से ट्रांसफर हो जाने के बाद जयपुर में बैठ कर रिश्वत कूट रहा था।*😱
*इन दोनों घटनाओं से पता चलता है कि राजस्थान पुलिस के होनहार अधिकारी किस तरह से जनता की सेवा में जुटे हुए हैं। दिक्कत यही है कि क़ानूनी रूप से दोषी वही कहलाते हैं जो रंगे हाथ पकड़े जाते हैं वरना जो पकड़े नहीं जाते वह अपनी वर्दी पर ईमानदारी का तमगा लगाकर शान से रिश्वत कमा रहे होते हैं।*😇
*यहां तो हाल यह है कि 90 फ़ीसदी ख़ाकी वर्दी रिश्वतखोरी में संलिप्त है। ईमानदार होने का दावा करने वाले अधिकारी या कर्मचारी गौंडावन पक्षियों की तरह दुर्लभ हैं।*🙄
*पुलिस विभाग में ईमानदार होना हो सकता है बड़ा आसान हो मगर ईमानदार सिद्ध होना बड़ा मुश्किल है।*😯
*अब तो हाल यह है कि हर पुलिस वाला चाहे वह किसी भी पोस्ट पर हो अपने हिसाब से काम कर जाता है।*🤷♂️
*थाने चकलाघरों की तर्ज़ पर बंधे हुए हैं। कौनसा थाना कितनी मासिक किश्तों में बंधा हुआ है इसकी बाक़ायदा रेट्स होती हैं। जिस क्षेत्र में जितने ज़ियादा अपराध होते हैं उतनी ही कमाई होती है। उतनी ही उसकी रेट होती है। उसी दर पर थानों की बोली लगती है। उतने ही शातिर थानाध्यक्ष बोली में शामिल होते हैं। उतने ही अनुभवी और धुरंधर थानों में पोस्टिंग पाते हैं। उतने ही व्यापक तौर पर मासिक चौथ वसूली की जाती है और ऊपर उच्चाधिकारियों को पहुंचाई जाती है। सब कुछ सिस्टम के साथ बंधा होता है। जुआ सट्टा ! अवैध शराब बिक्री! वैश्या वृति ! भूमाफियागिरी! सूखे नशे का कारोबार! स्पा की आड़ में देह व्यापार! ज़मीनों पर कब्जे सहित सारे कुकर्मों का बाक़ायदा लाइसेंस ज़ारी होता है। अब तो बज़री उद्योग भी चौथ का नया अध्याय बन चुका है।*🙋♂️
*कम ईमानदार या सीधे पुलिसकर्मियों को छोटे मोटे थानों में लगा दिया जाता है।*💁♂️
*यह एक सिस्टम है जो राजस्थान भर में बरसों बरस से चला आ रहा है। हर ज़िले में यह सुनियोजित ढ़र्रे पर संचालित है। चौथ का चौथाई भाग तो उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने में ही काम आ जाता है।*🥺
*किसी भी ज़िले में आप चले जाएं आप पाएंगे कि उच्चाधिकारियों द्वारा अधिकारियों की पोस्टिंग पर पूछा जाता है कि कहिए कौनसा थाना चाहिए❓साथ ही किस थाने की क्या रेट है बता दी जाती है! गला काट प्रतिस्पर्धा में पोस्टिंग की जाती है।*👍
*ऐसे में ए सी बी का कोई अधिकारी रिश्वत लेते पकड़ा जाता है तो हमारे लिए नई बात होती है । विभाग के लिए नहीं। यहाँ तो यह जुमला मशहूर है कि रिश्वत लेते पकड़े जाओ तो रिश्वत देकर छूट जाओ।*🤪
*यही वज़ह है कि रोज़ रिश्वतखोर बाइज़्ज़त बरी होकर फिर नौकरी में आ जाते हैं। शायद ही कोई ऐसा रिश्वत खोर हो जिसे अपराध सिद्ध होने पर जेल जाना पड़ा हो।*🙄
*कभी कभी तो लगता है कि भ्र्ष्टाचार को देश में नैतिक मान्यता दे देनी चाहिए। बस! उस पर भी इन्कम टेक्स लगा दिया जाए। स्वेच्छा से अधिकारी अपना रिटर्न दाख़िल करता रहे। कारोबारियों की तरह।आप ही बताइए क्या राय है आपकी।*🤷♂️


