सोने री चमकती रे धरा राजस्थान री: काव्य गोष्ठी में गूंजा राजस्थानी शौर्य और राम भक्ति का स्वर
✍️ *मोनू एस.छीपा। द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
शाहपुरा | अखिल भारतीय साहित्य परिषद की मासिक काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन गांधीपुरी स्थित केशव प्रन्यास भवन में संपन्न हुआ। इस साहित्यिक समागम में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से राजस्थान की वीर धरा के अदम्य साहस, त्याग और सांस्कृतिक वैभव का जीवंत वर्णन किया।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट जनों की उपस्थिति
गोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रज्ञा प्रवाह के राजस्थान क्षेत्र सहसंयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद अध्यक्ष तेजपाल उपाध्याय ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध राष्ट्रीय गीतकार बालकृष्ण बीरा उपस्थित रहे।
काव्य पाठ: राजस्थान के सौंदर्य और भक्ति का संगम
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. परमेश्वर कुमावत ‘परम’ की सरस्वती वंदना “तू शब्द सजा दे मां, मैं गीत सुनाता हूं” के साथ हुआ। इसके बाद काव्य धारा कुछ इस प्रकार बही:
- डॉ. परमेश्वर कुमावत ‘परम’: “सोने री चमकती रे धरा राजस्थान री। अठै वीरां रो इतिहास जगती जाणती।” रचना से राजस्थान के इतिहास को नमन किया।
- बालकृष्ण वीरा: “रणबंका रण बांकुरा की धरती राजस्थान।”
- जयदेव जोशी: राजस्थानी शब्दावली का प्रयोग करते हुए “रंग रंग के फुलां जेहड़ा शब्दां रो गलहार” प्रस्तुत किया।
- सोमेश्वर व्यास व कैलाश सिंह जाड़ावत: ने धोरों की धरती और मखमली रेत के सौंदर्य का वर्णन किया।
- डॉ. सत्यनारायण कुमावत व आशुतोष सिंह सोदा: की रचनाओं ने पूरे वातावरण को ‘राममयी’ बना दिया।
- ओम माली ‘अंगारा’: ने राजस्थानी भाषा की महत्ता पर जोर देते हुए कहा- “भाषा बिन यूं तड़पत राजस्थान, पानी बिन ज्यूं प्यासे हैं प्राण।”
‘आनंद मठ’ के 150 वर्ष: राष्ट्रभक्ति पर विशेष चर्चा
गोष्ठी के दूसरे सत्र में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के कालजयी उपन्यास ‘आनंद मठ’ पर गंभीर चर्चा हुई। मुख्य वक्ता डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने कहा कि आनंद मठ केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि वह प्रेरणापुंज है जिसने लाखों क्रांतिकारियों में आजादी का जज्बा भरा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस महान कृति को अवश्य पढ़ें, क्योंकि इसमें उन संन्यासियों का त्याग दर्ज है जिन्होंने देश रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
उपस्थिति: इस अवसर पर सी.ए. अशोक बोहरा, डॉ. कमलेश पाराशर, दीपक पारीक सहित कई प्रबुद्ध साहित्य प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


