क्षारसूत्र शल्य चिकित्सा शिविर का सातवां दिन, आयुर्वेदिक उपचार से लौट रही उम्मीद
1225 से अधिक मरीजों ने उठाया लाभ, रामशाला परिसर बना जन-आस्था और विश्वास का केंद्र
शाहपुरा | मोनू सुरेश छीपा। द वॉयस ऑफ राजस्थान
राष्ट्रीय आयुष मिशन, आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग, श्री रामनिवास धाम ट्रस्ट एवं भारत विकास परिषद शाहपुरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय क्षारसूत्र शल्य चिकित्सा शिविर का सातवां दिन भी उत्साह, विश्वास और सफल उपचार के साथ संपन्न हुआ। रामशाला परिसर में आयोजित यह शिविर अब केवल चिकित्सा केंद्र नहीं, बल्कि आमजन की आस्था और विश्वास का केंद्र बन चुका है।
सातवें दिन सुबह 10 बजे से ही पंजीयन काउंटर पर मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। उपनिदेशक आयुर्वेद विभाग डॉ. महाराज सिंह एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नारायण सिंह के मार्गदर्शन में शिविर का सातवां दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आयुर्वेद विभाग के कुशल निर्देशन एवं शिविर सह-प्रभारी डॉ. श्याम सुंदर स्वर्णकार की सतत मेहनत ने इस शिविर को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया है।
बिना लाठी के चले बुजुर्ग, भावुक हुआ माहौल
शिविर के दौरान एक भावनात्मक दृश्य उस समय सामने आया जब घुटनों के तीव्र दर्द से पीड़ित एक बुजुर्ग मरीज, जो लाठी के सहारे शिविर में पहुंचे थे, डॉ. हेमंत सोनी, डॉ. सुमित एवं डॉ. गोविंद की देखरेख में किए गए अग्निकर्म उपचार के बाद बिना किसी सहारे चलते नजर आए। बुजुर्ग मरीज ने इसे “आयुर्वेद का पुनर्जन्म” बताया, जिससे उपस्थित मरीजों और परिजनों की आंखें नम हो गईं।
सर्जरी का डर हुआ खत्म
क्षारसूत्र इकाई में भर्ती मरीजों ने बताया कि बड़े अस्पतालों में ऑपरेशन के नाम से वे भयभीत रहते थे, लेकिन यहां डॉ. विनीत जैन के आत्मीय परामर्श एवं चिकित्सकीय टीम की दक्षता ने उनका भय पूरी तरह समाप्त कर दिया। मरीजों ने आयुर्वेदिक पद्धति पर गहरा विश्वास व्यक्त किया।
आयुर्वेद केवल इलाज नहीं, जीवन जीने की कला
शिविर सह-प्रभारी डॉ. श्याम सुंदर स्वर्णकार ने कहा कि “आयुर्वेद केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।” उन्होंने बताया कि 10 दिवसीय शिविर का उद्देश्य रोग की जड़ पर कार्य करना है। सातवें दिन तक ऐसे कई मरीज शिविर में पहुंचे हैं, जो वर्षों से एलोपैथिक दवाइयों से थक चुके थे। पंचकर्म एवं शोधन चिकित्सा के बाद मरीजों के चेहरे पर लौटी संतुष्टि ही शिविर की सबसे बड़ी सफलता है।
मरीज नहीं, परिवार के सदस्य की तरह सेवा
शिविर की एक विशेष पहचान यह भी रही कि यहां मरीजों को केवल एक पंजीयन संख्या नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह स्नेह, सम्मान और संवेदनशीलता के साथ उपचार प्रदान किया जा रहा है।
शिविर में डॉ. दिलीप सोलंकी, डॉ. ममता मीना, डॉ. धर्मपाल खोवाल, डॉ. पवन कुमार कसौटिया, डॉ. खुशबू, डॉ. शिवसहाय, डॉ. धीर सिंह मीना, डॉ. हिमांशु माथुर सहित अन्य चिकित्सकों के सहयोग से भर्ती एवं नए मरीजों का सफल उपचार किया गया तथा निःशुल्क औषधियों का वितरण किया गया।
क्षारसूत्र शल्य चिकित्सा शिविर का सातवां दिन, आयुर्वेदिक उपचार से लौट रही उम्मीद 1225 से अधिक मरीजों ने उठाया लाभ, रामशाला परिसर बना जन-आस्था और विश्वास का केंद्र शाहपुरा | मोनू सुरेश छीपा। द वॉयस ऑफ राजस्थान
Leave a comment
Leave a comment


