शाहपुरा: बोरड़ा में उमड़ा आस्था का सैलाब, ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ में गूंजा सामाजिक समरसता का संदेश ✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*

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शाहपुरा: बोरड़ा में उमड़ा आस्था का सैलाब, ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ में गूंजा सामाजिक समरसता का संदेश

✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*

शाहपुरा (राजस्थान)। शाहपुरा के बोरड़ा ग्रामीण मण्डल में सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया। शनि महाराज मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर अपनी संस्कृति और एकता का परिचय दिया।

भव्य शोभायात्रा और मातृशक्ति का संगम

​हिंदू सम्मेलन समिति के सदस्य भंवरलाल जाट ने बताया कि धर्म सभा के मुख्य आयोजन से पूर्व एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में बोरड़ा मंडल के फतेहपुर, समेलिया, फुलिया खुर्द, लाठियां का खेड़ा, रायपुर, नया खेड़ा और निंबाहेड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों से आई लगभग 1100 महिलाओं ने कलश यात्रा में भाग लिया। गांव के मुख्य मार्गों से गुजरते समय ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया।

संतों का पाथेय: ‘संगठित हिंदू, समर्थ राष्ट्र’

​सम्मेलन में महंत प्रमोद दास जी महाराज (शनि मंदिर) और सहज राम जी महाराज (दूदला) का पावन सानिध्य रहा। सभा को संबोधित करते हुए महाराज प्रमोद दास जी ने कहा:

​”वर्तमान समय में सनातन धर्म के सामने सबसे बड़ी चुनौती संप्रदायों में बंटा होना है। हमें छुआछूत जैसी कुरीतियों को त्यागकर संगठित होना होगा। जब हिंदू संगठित होगा, तभी राष्ट्रहित के संकल्प सिद्ध होंगे।”

 

कुटुंब प्रबोधन और सामाजिक समरसता पर जोर

​संघ के मुख्य वक्ता और चित्तौड़ प्रांत के कुटुंब प्रबोधन सहसंयोजक सूर्य प्रकाश शर्मा ने हिंदू परंपराओं के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने सामाजिक समरसता, स्वदेशी अपनाना, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक शिष्टाचार जैसे विषयों पर जोर दिया।

​वहीं, मातृशक्ति का प्रतिनिधित्व कर रही विमला देवी शर्मा ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने और संयुक्त परिवार की महत्ता पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता बालकिशन झंवर (बोरडा) ने की।

आयोजन की मुख्य झलकियां:

  • जनसैलाब: सम्मेलन में 4000 से अधिक लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
  • भक्तिमय माहौल: क्षेत्र की 11 प्रभात फेरियों ने भजनों के साथ वातावरण को धर्ममय बना दिया।
  • सामूहिक भोज: कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर सामूहिक भोजन प्रसादी ग्रहण की।

​यह आयोजन क्षेत्र में सामाजिक एकता और वैचारिक जागरण की दृष्टि से मील का पत्थर साबित हुआ है।

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