श्रीमद् भागवत कथा भीलवाड़ा: संत दिग्विजयराम जी ने समझाया मित्रता का महत्व, सुदामा की झांकी रही आकर्षण
✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
भीलवाड़ा, 8 फरवरी। शहर के रोडवेज बस स्टैंड स्थित अग्रवाल उत्सव भवन में स्व. श्रीमती गीतादेवी तोषनीवाल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह का रविवार को महाआरती के साथ भव्य समापन हुआ। अंतिम दिन चित्तौड़गढ़ रामद्वारा के प्रखर वक्ता संत श्री दिग्विजयराम जी महाराज ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष के प्रसंगों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
मित्रता की अनूठी परिभाषा: कृष्ण-सुदामा प्रसंग
व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए संत दिग्विजयराम जी ने कहा कि वर्तमान स्वार्थी युग में सच्चे मित्र मिलना दुर्लभ है। उन्होंने कृष्ण-सुदामा की मित्रता को आदर्श बताते हुए कहा:
”संसार वाले मित्रता की आड़ में कांटे चुभाते हैं, लेकिन भगवान गोविंद मित्र के दुःख दूर करने के लिए कांटे निकालते हैं। दरिद्र वह नहीं जिसके पास धन नहीं, बल्कि वह है जिसके पास भगवान रूपी नाम धन नहीं है।”
कथा के दौरान जब सुदामा और द्वारिकाधीश के मिलन की सजीव झांकी सजाई गई, तो पूरा पांडाल ‘जय श्री कृष्ण’ के जयकारों से गूंज उठा। ‘अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो…’ जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और माहौल अत्यंत भावुक हो गया।
पंच कुण्डीय विष्णु महायज्ञ की पूर्णाहुति
कथा के साथ-साथ चल रहे सात दिवसीय पंच कुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ का भी रविवार को समापन हुआ। आचार्य पंडित गौरीशंकर शास्त्री के सानिध्य में संपन्न इस यज्ञ में:
- प्रतिदिन 25 जोड़ों ने आहुतियां प्रदान कीं।
- सात दिनों में कुल 1 लाख 60 हजार आहुतियां सर्व मंगल की कामना से दी गईं।
- समापन दिवस पर प्रधान कुंड में तोषनीवाल परिवार सहित अन्य यजमानों ने सजोड़ा पूर्णाहूति दी।
सुंदरकांड और भक्ति का संगम
इससे पूर्व शनिवार रात्रि को राष्ट्रीय संत डॉ. मिथिलेश नागर (नैनौराधाम) द्वारा संगीतमय सुंदरकांड का पाठ किया गया। हनुमान जी की भक्ति में डूबे श्रद्धालुओं ने सुंदरकांड के माध्यम से कष्ट निवारण और सुख-शांति की मंगलकामना की।
आयोजन की गरिमा
कथा विश्राम के अवसर पर ठाकुर श्री चारभुजा नाथ का मनमोहक श्रृंगार किया गया। तोषनीवाल परिवार के रामस्वरूप, दीपक और शुभम तोषनीवाल ने सभी आगंतुकों का आभार जताया। मंच का सफल संचालन पंडित अशोक व्यास द्वारा किया गया। कथा के अंत में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ की महाआरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
आयोजन की मुख्य झलकिया
- विषय: सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष प्रसंग।
- विशेष आकर्षण: कृष्ण-सुदामा मिलन की सजीव झांकी।
- यज्ञ का प्रभाव: 31 हजार दैनिक आहुतियों के साथ कुल 1.60 लाख आहुतियां।
- सांस्कृतिक संध्या: डॉ. मिथिलेश नागर द्वारा सुंदरकांड पाठ।


