जहाँ किसी का वध न होता हो, उसे अवध कहते है। = श्री मोरारी बापू।
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गुलाबपुरा (रामकिशन वैष्णव) स्थानीय सार्वजनिक धर्मशाला में चल रहे श्रीदिव्य चातुर्मास सत्संग
महामहोत्सव शारदीय नवरात्रा के पावन अवसर पर नवदिवसीय श्रीरामकथा
ज्ञानयज्ञ में कथा व्यास-श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री दिव्य मोरारी बापू ने बताया कि
।। रामकृपा बिनु सुलभ न सोई।। अर्थात अयोध्या का एक नाम अवध भी है और अवध शब्द का सांकेतिक अर्थ होता है चौरासी लाख शरीरों के बाद, जो अंतिम अवधि है मनुष्य शरीर उसी का नाम अवध है। हमारा आपका शरीर भी अवध है। जहां किसी का वध न होता हो उसे अवध कहते हैं। धर्म का मार्ग किसी को करने का आदेश नहीं देता है। धर्म सभी को जीने का आदेश देता है। सबको जीने का समय दो। अवसर दो। हमारे धर्म में किसी को मारना भी पाप है। जियो और जीने दो। व्यक्ति अपने इंद्रियों के स्वाद के लिए निरपराधी जानवरों को मारते हैं। उनसे पूछा जाये, इन जानवरों ने आपका क्या किया, फिर क्या वे मरना चाहते हैं? क्या मांस के बिना आप जीवित नहीं रह सकते हैं? फिर आप जानवरों को क्यों मारते हैं? क्षणिक सुख के लिए व्यक्ति बड़े से बड़े पाप कर लेता है और फिर उसका फल दुःख होता है।
‘अवध’अर्थात् मनुष्य का शरीर। राम ब्रह्म हैं। भगवती जानकी भक्त हैं। लक्ष्मण वैराग्य हैं। जिस शरीर से ज्ञान और भक्ति निकल जाय वह शरीर शव समान हो जाता है। व्यक्ति के शरीर की पूजा नहीं होती है। बल्कि उसके गुणों की पूजा हुआ करती है। आप अपने जीवन में ईश्वर को जितना प्रवेश करने जाएंगे- आपका जीवन उतना सुंदर और भावुक बनता चला जायेगा। आपके ट्रांजिस्टर में अनेक स्टेशन होते हैं। जिसमें आप सुई लगा देते हैं उसी का समाचार आने लगता है। इसी तरह शरीर के अंदर भी बहुत सारे स्टेशन है- काम के, क्रोध के, लोभ के, ज्ञान, भक्ति, वैराग्य के शरीर में भी स्टेशन है हम जहां सुई लगा देते हैं वहां के समाचार आने लगते हैं।
जब हम काम में मन लगाते हैं तो वासना के परमाणु हमारे अंदर प्रवेश करने लगते हैं। जब हम क्रोध में मन लगाते हैं तो शत्रु के परमाणु हमारे अंदर प्रवेश करने लगते हैं। लोभ में मन लगाते हैं तो धन के परमाणु हमारे अंदर प्रवेश करते हैं और जब भक्ति, ज्ञान, बैराग में मन लगाते हैं तो चेतना के परमाणु हमारे अंदर प्रवेश करते हैं। हमारा जीवन चैतन्य होने लगता है और जीवन में चेतना बढ़ती जाएगी त्यों त्यों आपका जीवन सात्विक और सुंदर आकर्षक बनता चला जाएगा।कथा में श्री दिव्य सत्संग मंडल अध्यक्ष अरविंद सोमाणी,नंदलाल काबरा, एडवोकेट विजय प्रकाश शर्मा, सुभाष चंद जोशी, मधुसूदन मिश्रा, रामेश्वर दास, इत्यादि मौजूद थे।


