
*जीवन में बदलाव का माध्यम बने चातुर्मास,सामायिक के साथ करें अधिकाधिक त्याग व प्रत्याख्यान- कुमुदलताजी म.सा.*
*सुभाषनगर स्थानक में महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा के चातुर्मासिक मंगल प्रवचन शुरू*
*चातुर्मास में गुरू पूर्णिमा पर कल होगी पहली साप्ताहिक अनुष्ठान आराधना*
✍️ *मोनू नामदेव।द वॉयस ऑफ 9667171141*
भीलवाड़ा,9 जुलाई। आप परम सौभाग्यशाली है जो जिनशासन से जुड़ जिनवाणी सुनने का अवसर मिला है। चातुर्मास में जिनवाणी का रसपान कर जीवन को अधिक सार्थक बनाना है। चातुर्मास के चार माह हमारे जीवन में बदलाव का माध्यम बने।छोटे-छोट नियम, त्याग, प्रत्याख्यान लेकर चातुर्मास को सार्थक बनाए। चार माह में 120 घंटे देकर प्रतिदिन एक घंटे का समय जिनवाणी श्रवण के लिए अवश्य निकाले। यह विचार अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासाध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. ने बुधवार को आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति के तत्वावधान में सुभाषनगर जैन स्थानक में आयोजित वर्षावास में चौमासी पक्खी के अवसर पर मंगल प्रवचन में व्यक्त किए। चातुर्मासिक प्रवेश के बाद पहले ही दिन प्रवचन में श्रावक-श्राविकाएं जिनवाणी श्रवण करने के लिए उमड़े। महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में गुरूवार को सुबह 8.45 से 9.15 बजे तक गुरू पूर्णिमा पर विशेष प्रवचन होंगे एवं इसके बाद साप्ताहिक अनुष्ठान आराधना के तहत वर्षावास का पहला अनुष्ठान होगा। महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. ने वर्षावास में अधिकाधिक धर्म ध्यान व तप त्याग करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि हमे चार माह घर में जमीकंद उपयोग का त्याग करना है ओर चार माह में प्रत्येक श्रावक-श्राविका कम से कम 120 सामायिक करने का लक्ष्य रखे। हमारे परिवार के युवाओं ओर बच्चों को भी धर्म का ज्ञान व संस्कारों से जोड़ने का कार्य भी इस चातुर्मास में करना है। उन्होंने संयम जीवन में वर्षावास का महत्व बताते हुए कहा कि जो संत भगवान महावीर की आज्ञा में विचरण करते है उनके लिए ऋतु परिवर्तन के साथ चार माह के वर्षावास का विधान है। चौमासी चतुर्दशी का प्रतिक्रमण करने के बाद विहार नहीं कर सकते ये महावीर,गौतमस्वामी ओर सुधर्मास्वामी की परम्परा है। वर्षावास चार माह का होता है तो जीवन की गति भी चार होती है। नरक गति में जाने से बचने के लिए ऐसी कोई विराधना नहीं करे जो पाप कर्म का बंध करे। जो व्यक्ति छल,कपट व मायाचारी होता है वह तिर्यंच गति में जाता है। हार मान जाएंगे तो मुनष्य जन्म को सार्थक नहीं कर पाएंगे। धर्म से जुड़ मनुष्य जन्म सार्थक कर लिया तो देव गति मिल सकती है। उन्हांेंने चातुर्मास आयोजन समिति एवं सुभाषनगर श्रीसंघ द्वारा चातुर्मासिक मंगल प्रवेश के अवसर पर की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा भीलवाड़ावासी सौभाग्यशाली है जो उनके यहां 12 भावना की तरह 12 चातुर्मास हो रहे है। जहां चाहे वहां जाए पर जिनवाणी श्रवण का लाभ अवश्य पाए। प्रवचन के शुरू में वास्तुशिल्पी साध्वी पद्मकीर्तिजी म.सा. एवं साध्वी मण्डल ने श्री गौतम स्वामी की आराधना कराई। प्रवचन में स्वर साम्राज्ञी महासाध्वी महाप्रज्ञाजी म.सा., विद्याभिलाषी साध्वी राजकीर्तिजी म.सा. आदि ठाणा का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। श्री जैन दिवाकर महिला मण्डल एवं सुभाषनगर महिला मण्डल की बहनों ने स्वागत गीत की प्रस्तुति दी। अतिथियों का स्वागत चातुर्मास समिति के अध्यक्ष दौलतमल भड़कत्या एवं सुभाषनगर श्रीसंघ के अध्यक्ष हेमन्त कोठारी ने किया। संचालन चातुर्मास समिति के सचिव राजेन्द्र सुराना ने किया। प्रवचन में भीलवाड़ा के अलावा मुंबई सहित कई स्थानों से आए श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे।
*चातुर्मास में हर गुरूवार को अनुष्ठान एवं हर शुक्रवार को*
पद्मावती एकासना आराधना
पूज्य महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा 4 के सुभाषनगर स्थानक में होने वाले चातुर्मास में हर गुरूवार सुबह मंगलकारी अनुष्ठान होगा। इसी तरह हर शुक्रवार को केवल श्राविकाओं के लिए सुबह 11 बजे पद्मावती एकासन आराधना विधि होगी। हर शनिवार को प्रवचन के बाद प्रश्नमंच एवं हर रविवार को ही दोपहर 2 बजे से बच्चों के लिए संस्कार शिविर का आयोजन होगा। चातुर्मास के दैनिक कार्यक्रमों के तहत सुबह 6.30 बजे से प्रार्थना, सुबह 8.45 बजे से प्रवचन, दोपहर 2.30 से 4 बजे तक धर्मचर्चा एवं नित्य प्रतिक्रमण सूर्यास्त के बाद होगा।


