98 प्रतिशत अरावली पहाड़ियों पर खनन की अनुमति नहीं, कांग्रेस भ्रम फैला रही है: भूपेंद्र यादव
सुप्रीम कोर्ट ने केवल प्लान बनाने को कहा, भाजपा शासन में अरावली सबसे अधिक सुरक्षित—केंद्रीय पर्यावरण मंत्री
नई दिल्ली | मोनू सुरेश छीपा
अरावली पहाड़ियों को लेकर 100 मीटर की परिभाषा के विरोध में कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे अभियान पर केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि कांग्रेस बेवजह भ्रम फैला रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा शासन में अरावली पर्वतमाला सबसे अधिक सुरक्षित रही है और वर्तमान में 98 प्रतिशत अरावली पहाड़ियों पर किसी भी प्रकार की खनन अनुमति नहीं है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस जिस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर विरोध कर रही है, वह वास्तविकता से परे है। सुप्रीम कोर्ट ने केवल प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं, न कि खनन की अनुमति प्रदान की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अभी तक कोई प्लान बना ही नहीं है, तो विरोध किस बात का किया जा रहा है।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि 100 मीटर की परिभाषा पहाड़ी के ऊपर वाले थोर से नीचे जमीन के अंदर तक नापी जाएगी। इस परिभाषा के अनुसार भी अरावली की 98 प्रतिशत पहाड़ियां सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में, जब राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे, तब इस प्रारूप पर सहमति दी गई थी।
सिर्फ चार जिलों में सीमित खनन की अनुमति
यादव ने जानकारी दी कि अरावली पर्वतमाला दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैली हुई है, जिससे देश के कुल 39 जिले जुड़े हैं। इनमें से केवल चार जिलों—उदयपुर, राजसमंद (राजस्थान), साबरकांठा (गुजरात) और महेंद्रगढ़ (हरियाणा) में ही खनन की अनुमति दी गई है। दिल्ली में तो किसी भी प्रकार का खनन संभव ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि अरावली में सिर्फ पहाड़ ही नहीं, बल्कि झीलें, किले, वन, मंदिर और शहर भी स्थित हैं। ऐसे में सरकार खनन की खुली छूट कैसे दे सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने अरावली संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि अरावली क्षेत्र में 54 टाइगर रिजर्व और एलीफेंट रिजर्व विकसित किए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि अरावली क्षेत्र में क्रिटिकल मिनरल्स की भरमार है, लेकिन इसके बावजूद खनन को लेकर सरकार बेहद सख्त है। अवैध खनन के खिलाफ सभी राज्यों को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है और इस दिशा में उन्होंने पहले ही कड़ा रुख अपना रखा है।
कांग्रेस सांसदों पर विश्वासघात का आरोप
हनुमानगढ़ में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री से जुड़े वायरल वीडियो को लेकर भूपेंद्र यादव ने राजस्थान के छह कांग्रेसी सांसदों पर विश्वासघात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य शिष्टाचार भेंट थी, जिसे तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।
यादव ने बताया कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राजस्थान के कांग्रेस सांसद राहुल कस्वा, कुलदीप इंदौरा, अंजना जाटव सहित अन्य ने उनसे चाय पर मुलाकात की इच्छा जताई थी। शिष्टाचारवश उन्होंने अपने कक्ष में आमंत्रित किया, जहां अनौपचारिक बातचीत हुई। लेकिन इस बातचीत का वीडियो बनाना और उसे सार्वजनिक करना विश्वासघात है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एथेनॉल को लेकर उन्होंने कोई नई बात नहीं कही, यह बयान उनसे पहले केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी भी दे चुके हैं। कांग्रेस को आरोप लगाने से पहले आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।
98 प्रतिशत अरावली पहाड़ियों पर खनन की अनुमति नहीं, कांग्रेस भ्रम फैला रही है: भूपेंद्र यादव सुप्रीम कोर्ट ने केवल प्लान बनाने को कहा, भाजपा शासन में अरावली सबसे अधिक सुरक्षित—केंद्रीय पर्यावरण मंत्री
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