शाहपुरा में साहित्यिक गोष्ठी व भाषा सम्मेलन सम्पन्न
विविध भाषाओं, काव्य–गजलों और ओजस्वी रचनाओं से सजी अखिल भारतीय साहित्य परिषद की मासिक गोष्ठी
मोनू सुरेश छीपा।खबर का असर
शाहपुरा।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद इकाई शाहपुरा द्वारा मधुकर भवन संघ कार्यालय में मासिक साहित्यिक गोष्ठी एवं भाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय भाषाओं, संस्कृति और साहित्य के संरक्षण व संवर्धन को सशक्त मंच प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत माँ भारती के चित्र पर विभाग संयोजक रामप्रसाद माणमिया, आशुतोष सिंह सौदा एवं तेजपाल उपाध्याय द्वारा माल्यार्पण के साथ हुई। डॉ. परमेश्वर कुमावत ‘परम’ ने परिषद गीत “भारती की लोक मंगल साधना साकार हो” से गोष्ठी का विधिवत शुभारंभ किया।
गोष्ठी में भँवर ‘भड़ाका’ ने “आँचल नारी जात का गहना है” कविता के माध्यम से नारी अस्मिता और आधुनिक पहनावे पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत किया। विष्णुदत्त शर्मा ‘विकल’ ने उर्दू ग़ज़ल के शेर सुनाकर वातावरण को ग़ज़लमय कर दिया। गोपाल पंचोली ने “रोड पर दो व्यक्ति जोर-जोर से आपस में लड़ रहे थे” कविता द्वारा ओछी मानसिकता पर प्रहार किया।
ओम माली ‘अंगारा’ ने प्रकृति के दोहन और मानव की स्वार्थलोलुपता पर करारी चोट करते हुए भावपूर्ण कविता सुनाई। सी.ए. अशोक बोहरा ने ग़ज़ल के माध्यम से प्रेम और संवेदना की अभिव्यक्ति की। डॉ. परमेश्वर कुमावत ‘परम’ ने संस्कृत श्लोकों के साथ राजस्थानी गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
एडवोकेट दीपक पारीक ने महाभारत के अभिमन्यु प्रसंग पर आधारित ओजस्वी कविता से शौर्य का चित्रण किया। वरिष्ठ पत्रकार मूलचंद पेसवानी ने सिंधी भाषा की रचना से भाषाई विविधता का सुंदर प्रतिनिधित्व किया। डॉ. कमलेश पाराशर ने सनातन संस्कृति की रक्षा का आह्वान करती कविता सुनाई।
बालकृष्ण जोशी ‘बीरा’ ने देशभक्ति और राजस्थानी लोकगीतों से गोष्ठी को संगीतमय बनाया। जयदेव जोशी ने वैदिक संस्कृत के श्लोकों के साथ बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं पर अत्याचार को लेकर भावुक रचना प्रस्तुत की। आशुतोष सिंह सौदा ने मेवाड़ की गौरव गाथा पर ओजमयी कविता सुनाकर इतिहास के प्रसंगों को रेखांकित किया।
संस्था अध्यक्ष तेजपाल उपाध्याय ने सामाजिक असमानता पर प्रहार करती कविता प्रस्तुत की, जबकि समापन पर विभाग संयोजक रामप्रसाद माणमिया ने शाहपुरा की बलिदानी धरती और बारहठ परिवार के त्याग को नमन करते हुए रचना सुनाई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामप्रसाद माणमिया रहे, अध्यक्षता तेजपाल उपाध्याय ने की तथा गोष्ठी की विवेचना एडवोकेट दीपक पारीक ने की। अंत में आगामी माह की गोष्ठी का विषय “गणतंत्र या आज़ादी” निर्धारित किया गया।
—


