नौ दिवसीय श्रीराम कथा का समापन पूर्णाहुति के साथ हुआ।
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गुलाबपुरा (रामकिशन वैष्णव) शहर के गांधीनगर श्री राधे कृष्ण महाकालेश्वर मंदिर मे चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का बुधवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। श्रीराम कथा मे कथा व्यास – श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने समुद्र पर सेतु बंधन, रावण पर विजय, राम राज्याभिषेक सहित प्रसंगो पर विस्तृत वर्णन किया। कथा व्यास श्री दिव्य मोरारी बापू ने बताया की श्री जामवंत जी की आज्ञा से भगवान के समस्त सैनिक पत्थर शिला लाकर देते हैं, नल-नील उस पर भगवान का नाम, राम नाम लिखते हैं और पत्थर तैरने लगता है। इस तरह से समुद्र पर सेतु निर्माण का कार्य प्रारम्भ हो गया। पूज्य गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज कहते हैं- राम लिखने से अगर पत्थर तैर रहे हैं। तो क्या हम सब राम नाम का जप करेंगे तो हमारा उद्धार नहीं होगा? अर्थात अवश्य होगा। “श्री रघुवीर प्रताप ते सिन्धु तरे पाषाण। ते मतिमंद के मोह बस जाहिं भजहिं प्रभु आन।।”भगवान श्रीराम का रावण पर विजय, इसका आध्यात्मिक अर्थ है- सच्चाई की बुराई पर विजय, अपने यहां एक बहुत प्रसिद्ध कहावत है।” सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन हार नहीं सकता है।” वेद में लिखा है-” सत्यमेव जयते” विजय सदैव सत्य की होती है।
श्रीधाम अयोध्या में भगवान श्री राम का राज्याभिषेक होता है।
सिंघासन पर त्रिभुवन साईं।
देखि सुरन्ह दुंदुभी बजाईं ।।
श्रीरामचरितमानस में रामराज्य का बड़ा विशद वर्णन है। राम राज्य में-
दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहूहि व्यापा ।।
बयरु न कर काहु सन कोई ।
राम प्रताप विषमता खोई ।।
राम राज बैठें त्रैलोका ।
हरषित भये गये सब शोका।। श्रीराम कथा के समापन पर यजमानो द्वारा पूर्णाहुति दी गई व गुलाबपुरा दिव्य सत्संग मंडल द्वारा कथा व्यास श्री मोरारी बापू व व्यवस्थापक घनश्याम दास जी महाराज का स्वागत अभिनंदन किया गया। इस दौरान सत्संग मंडल के सुभाष जोशी, दातार सिंह, जितेंद्र नागर, धीरेन्द्र नागर, जगदीश चौधरी, धीरज सिंह चौहान, कैलाश सोनी, अरविंद माहेश्वरी, भंवर सिंह नरुका सहित बडी संख्या मे श्रद्धालु मौजूद थे।
नौ दिवसीय श्रीराम कथा का समापन पूर्णाहुति के साथ हुआ।
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