शाहपुरा: बासंती फुहारों और संगीत की लहरियों के बीच मना ‘सरस्वती जन्मोत्सव’, गोविंददेव जी मंदिर में उमड़ी भक्ति
✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
शाहपुरा | 23 जनवरी 2026
शाहपुरा (सदर बाजार): ज्ञान, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती का प्राकट्योत्सव (बसंत पंचमी) आज सदर बाजार स्थित भगवान श्री गोविंददेव जी के मंदिर में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रातःकालीन सत्र में बासंती रिमझिम फुहारों के बीच संगीत की स्वर लहरियों ने संपूर्ण वातावरण को दिव्यता से भर दिया।
ब्रह्मा के कमंडल से हुआ माँ का प्राकट्य: पंडित शर्मा
आयोजन के दौरान पंडित महावीर प्रसाद शर्मा ने शास्त्रीय मतानुसार सरस्वती अवतार प्रसंग का सुंदर विवेचन किया। उन्होंने बताया कि सृष्टि के निर्माण के बाद जब सर्वत्र नीरवता और शांति थी, तब भगवान विष्णु की प्रेरणा से ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल के जल से एक चतुर्भुज रूपी बालिका को प्रकट किया।
पंडित जी ने माँ सरस्वती के चार प्रतीकों का महत्व समझाते हुए कहा:
- वीणा: संगीत और आनंद का प्रतीक।
- पुस्तक: अपार ज्ञान का प्रतीक।
- माला: भक्ति और एकाग्रता का प्रतीक।
- अभय मुद्रा: ईश्वरीय आशीर्वाद का प्रतीक।
उन्होंने श्लोक ‘साहित्य संगीत कला विहीनः…’ के माध्यम से बताया कि इन चारों के बिना मनुष्य का जीवन पशु के समान है।
भजन प्रस्तुतियों ने किया भाव-विभोर
उत्सव में भक्ति और संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। भक्तमती रंजना डोडिया ने “हे स्वर की देवी माँ, वाणी में मधुरता दे” और मंजू शर्मा ने “जय जय जय हे वीणा वादिनी, शिव कल्याणी माता भवानी” जैसे सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। इन सरस्वती वंदनाओं ने उपस्थित मातृशक्ति और भक्तजनों को भक्ति भाव से सराबोर कर दिया।


