सस्ती बजरी और सुलभ निर्माण: राजस्थान सरकार ने कसी कमर, आमजन को जल्द मिलेगी बड़ी राहत
✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
जयपुर/राजस्थान: प्रदेश में आमजन के ‘अपने घर’ के सपने को साकार करने के लिए राजस्थान सरकार ने बजरी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर निर्णायक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद खान विभाग अब “मिशन मोड” पर काम कर रहा है, ताकि अवैध खनन पर लगाम लगे और जनता को वाजिब दामों पर निर्माण सामग्री मिल सके।
नई लीज आवंटन और ई-नीलामी में तेजी
राज्य सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में बजरी के नए ब्लॉक्स चिह्नित कर उनकी ई-नीलामी (e-Auction) की प्रक्रिया तेज कर दी है। हाल ही में टोंक, भीलवाड़ा और अन्य क्षेत्रों में लीज आवंटन के लिए जारी अधिसूचनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार बाजार में बजरी की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित करना चाहती है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे ही नई लीज से उत्पादन शुरू होगा, बजरी की दरें अपने आप नीचे आ जाएंगी।
M-Sand Policy 2024: एक गेम-चेंजर पहल
बजरी की किल्लत का स्थायी समाधान निकालने के लिए सरकार M-Sand (Manufactured Sand) को बड़े स्तर पर बढ़ावा दे रही है।
- सरकारी प्रोत्साहन: नई एम-सैंड इकाइयों को ‘उद्योग’ का दर्जा दिया गया है और निवेश पर भारी सब्सिडी (RIPS-2024 के तहत) दी जा रही है।
- अनिवार्य उपयोग: सरकारी निर्माण कार्यों में 25% एम-सैंड का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे प्राकृतिक बजरी पर दबाव कम होगा और यह आम जनता के लिए सस्ती उपलब्ध होगी।
अवैध खनन के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’
मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप प्रशासन ने अवैध परिवहन के खिलाफ विशेष अभियान (SIT) चला रखा है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि अवैध खनन न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि इससे राजस्व की भी हानि होती है। प्रशासन की सख्ती का उद्देश्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि बजरी का कारोबार केवल वैध और पारदर्शी तरीके से हो।
जनप्रतिनिधियों का सहयोग और सरकारी संवाद
सरकार लगातार जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निकायों के संपर्क में है ताकि जमीनी स्तर पर आ रही बाधाओं को दूर किया जा सके। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक बजरी माफिया के शोषण का शिकार न हो। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लीज आवंटन में आने वाली कानूनी अड़चनों का त्वरित निस्तारण करें।
“हमारा लक्ष्य निर्माण लागत को कम करना और पर्यावरण का संरक्षण करना है। नई खनन नीतियों और एम-सैंड को बढ़ावा देने से जनता को बहुत जल्द सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बजरी मिलने लगेगी।” — (विभागीय सूत्र/सरकार का पक्ष)


