शाहपुरा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की मासिक गोष्ठी संपन्न, कवियों ने बसंत के रंगों से सजी रचनाएं पढ़ीं
✍️ *मोनू सुरेश छीपा। द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
शाहपुरा (राजस्थान): अखिल भारतीय साहित्य परिषद की शाहपुरा इकाई द्वारा आयोजित मासिक साहित्यिक गोष्ठी में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बसंत ऋतु के सौंदर्य और सामाजिक सरोकारों को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता तेजपाल उपाध्याय ने की, जबकि सोमेश्वर व्यास विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
सरस्वती वंदना से काव्य यात्रा का शुभारंभ
गोष्ठी का आगाज़ विष्णु दत्त शर्मा ‘विकल’ की मधुर सरस्वती वंदना “माँ शारदे उपकार दे मुझ जड़मति को तार दे” के साथ हुआ। इसके पश्चात कवियों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं।
बसंत के विविध रंग और कवियों की प्रस्तुतियां
- सोमेश्वर व्यास ने प्रकृति के उल्लास को दर्शाती कविता “ऋतु वसन्त का हुआ आगमन” सुनाई।
- डॉ. कमलेश पाराशर ने पर्यावरण और जीवन के द्वंद्व पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत किया।
- जयदेव जोशी और ओम माली ‘अंगारा’ ने बसंत के प्राकृतिक सौंदर्य और शिवाजी के शौर्य की ओजपूर्ण कविताओं से समां बांध दिया।
- भँवर ‘भड़ाका’ ने जीवन की नश्वरता पर अपनी पंक्तियों से सबको भावुक किया।
- डॉ. परमेश्वर कुमावत ‘परम’ ने हिंदू समरसता और बसंत के अंतर्संबंधों पर प्रभावी रचना पेश की।
राजस्थानी संस्कृति और समकालीन व्यंग्य
कार्यक्रम में राजस्थानी भाषा का विशेष पुट देखने को मिला। अध्यक्ष तेजपाल उपाध्याय ने वर्तमान जीवनशैली और बीमारियों पर राजस्थानी व्यंग्य सुनाकर कटाक्ष किया। वहीं, बालकृष्ण जोशी ‘बीरा’ और आशुतोष सिंह सौदा के राजस्थानी गीतों ने गोष्ठी को संगीतमय बना दिया।
नवोदित रचनाकार दर्शन शर्मा ने बसंत को सरहद पर तैनात सैनिक के शौर्य से जोड़कर देशभक्ति का जज्बा जगाया। सी.ए. अशोक बोहरा, विष्णु दत्त शर्मा ‘विकल’ और मथुरा से योगेंद्र शर्मा ने भी अपनी रचनाओं और भजनों से गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई।
निष्कर्ष और विवेचना
गोष्ठी के अंत में सभी रचनाओं की विस्तृत विवेचना विष्णु दत्त शर्मा ‘विकल’ द्वारा की गई। कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों ने विभिन्न रसों, छंदों और विधाओं का आनंद लिया


