‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ पर आधारित पुस्तक का भव्य विमोचन
राष्ट्रीय सम्मेलन के शोधपत्रों का संकलन, विद्वानों ने बताया—ज्ञान परंपरा से ही बनेगा भारत विश्वगुरु
✍️ मोनू सुरेश छीपा, द वॉयस ऑफ राजस्थान
शाहपुरा। एवं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन (30-31 जनवरी 2025) में प्रस्तुत विभिन्न शोधपत्रों को संकलित कर ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ विषय पर आधारित पुस्तक का भव्य विमोचन किया गया।
इस पुस्तक के संपादक प्राचार्य तथा सम्मेलन के संयोजक रहे। पुस्तक का विमोचन द्वारा किया गया।
विमोचन के अवसर पर साध्वी सरस्वती दीदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा वेदों, उपनिषदों और प्राचीन भारतीय दर्शन में निहित वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक ज्ञान को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करती है। यह परंपरा आज भी मानव जीवन को दिशा देने में सक्षम है।
पुस्तक के संपादक डॉ. पुष्कर राज मीणा ने बताया कि इस ग्रंथ में खगोल विज्ञान, गणित, आयुर्वेद और योग जैसे विषयों पर प्राचीन भारतीय मनीषियों के योगदान को शोधपरक ढंग से संकलित किया गया है। उन्होंने कहा कि केवल साक्षरता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के लिए युवाओं को अपनी जड़ों और पूर्वजों के बौद्धिक पुरुषार्थ को समझना होगा।
कार्यक्रम के दौरान (क्षेत्र सहसंयोजक), , , , , , एवं सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
यह पुस्तक भारतीय ज्ञान की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।


