*‼️यदि झालावाड़ वाली घटना किसी कोचिंग संस्थान में घट जाती तो?????‼️*😱
_*क्या आगे कभी स्कूलों में बच्चे क़ुर्बान नहीं होंगे??*_😳
*✒️सुरेन्द्र चतुर्वेदी*
*यह तो तय हो गया है कि जब तक कहीं कोई चिर प्रतीक्षित वारदात घटित न हो जाये तब तक किसी के कानों में जूं नहीं रेंगती। झालावाड़ क्षेत्र में स्कूल की ईमारत गिरी और सात मासूम बलि चढ़ गए ! तब सरकार! प्रशासन!राजनेताओं और समाज की आँखें खुलीं। फिर तो ऐसा लगा जैसे भविष्य में कहीं कोई ऐसी वारदात नहीं घटेगी।चारों तरफ से बयानों की बारिश होने लगी। सहानुभूति का मानसून आ गया। श्रद्धांजलि का बाज़ार सज गया। आलोचनाओं की प्रतिस्पर्धा होने लगी। हज़ारों स्कूलों के जर्जर भवनों पर बात होने लगी।*🙋♂️
*मित्रो! इस देश का यह दुर्भाग्य है कि कोई भी वारदात तब तक चर्चाओं में रहती है जब तक कोई और चौंकाने वाली घटना न घट जाए। जब लव जिहाद की कोई दिल हिलाने वाली घटना होती है तो पूरे समाज मे कई दिनों तक ऐसा महसूस करवाया जाता है कि जैसे सनातनी समाज मुस्लिम समाज को सबक सिखा कर ही दम लेगा। नारे सड़कों पर मुठ्ठी तान कर उतर जाते हैं। मीडिया में लोग एक दूसरे को कोसने के टूर्नामेंट में शिरकत करने लगते हैं।*👍
*कावड़ियों से जुड़ी ख़बर यदि सामने आ जाए तो पूरा देश उसी ख़बर के पोस्टमार्टम में लग जाता है।*😳
*हर बार नई ख़बर पर समाज उद्वेलित होता है और कुछ दिनों बाद फिर कोई और नयी ख़बर चर्चाओं में आ जाती है।*💁♂️
*ऐसा भी नहीं कि झालावाड़ से पहले कहीं कोई स्कूल की ईमारत गिरी न हो। बच्चों की मौतें न हुई हों और यह भी ताल ठोक कर नहीं कहा जा सकता कि आगे कोई ऐसी पुख़्ता व्यवस्था हो जाएगी कि घटनाएं नहीं होंगी।*😣
*सब चार दिनों के शोर की बात होती है। फिर समाज का उद्वेग स्खलित हो जाता है।*🫢
*यहाँ मैं अपने सुधि पाठकों को बता दूँ की झालावाड़ के पिपलोदी स्कूल की घटना राजस्थान में पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले कई बार स्कूलों की इमारतें गिरती रही हैं।*🤨
*मेरी सूचनाओं के मुताबिक़ झालावाड़ से पहले , जनवरी 2025 में बूंदी जिले के फटुकड़ा गांव में स्कूल की छत का प्लास्टर गिरा था। इसमें पांच बच्चे घायल हुए थे। यही नहीं मई 2025 के आसपास अलवर जिले के हरसोली गांव में स्कूल की छत गिरने से तीन छात्राएं घायल हुई थीं। हादसे का कारण अधूरी और असुरक्षित निर्माण प्रक्रिया थी।*😳
*इसी तरह 26 जुलाई 2025 को नागौर और करौली में भी पिपलोदी स्कूल जैसी घटना घटी , लेकिन सौभाग्य से छुट्टी के कारण कोई बच्चा मौजूद नहीं था। वरना लोग झालावाड़ को भूल जाते।*🙋♂️
*यहाँ आपको बता दूँ कि राज्य भर में 60 हज़ार स्कूल ऐसे हैं जहां कक्षाओं की छतों से बारिश में झरने फूट पड़ते हैं। कमरे सीलन से बदबू मारते हैं। इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि कभी भी गिर सकती हैं।*😱
*निजी स्कूलों में प्रबंधन फिर थोड़ी बहुत देख भाल कर लेता है मगर सरकारी स्कूलों का तो ईश्वर ही मालिक़ है। यहां एक सवाल और? ज़रा सोचिए कि यदि पिपलोदी वाली घटना किसी कोचिंग संस्थान में हो जाती तो सरकार क्या इसी तरह लीपा पोती करती? मेरे खयाल से पूरे राज्य के निजी कोचिंग सेंटर्स को जांच के घेरे में ले लेती। न जाने कौन कौन से प्रतिबंध लगा दिए जाते मगर सरकारी स्कूलों के बच्चों की जानें तो जैसे होती ही क़ुर्बानी देने के लिए हैं।*😯
*मुझे ख़ुशी है कि मुख्य मंत्री भजन लाल शर्मा ने इस बार संवेदनशील होते हुए दो सौ करोड़ की राशि जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिये मंज़ूर कर दी है। सांसदों और विधायकों से भी आग्रह किया गया है कि वह अपने बजट से स्कूलों की मदद करें। उम्मीद की जानी चाहिए कि पिपलोदी वाली दर्दनाक घटना की पुनरावृत्ति न हो। यही मृत बच्चों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।*🙏


