बहुआयामी हुआ आयुर्वेद शिविर: क्षार सूत्र के साथ पंचकर्म, अग्निकर्म और स्वर्ण प्राशन ने बटोरी सुर्खियाँ
चौथे दिन उमड़ा जनसैलाब, बच्चों के बौद्धिक विकास से लेकर वृद्धों के दर्द निवारण तक का हुआ उपचार
भीलवाड़ा।
बाइलाइन: मोनू सुरेश छीपा
आयुर्वेद विभाग द्वारा रामशाला भवन, बस स्टैंड (शाहपुरा) में आयोजित पांच दिवसीय विशिष्ट आयुर्वेद चिकित्सा शिविर का स्वरूप अब पूरी तरह बहुआयामी हो गया है। शिविर के चौथे दिन यह केवल क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा तक सीमित न रहकर पंचकर्म, अग्निकर्म और स्वर्ण प्राशन जैसी आयुर्वेद की प्रभावी विधाओं के साथ एक ‘संपूर्ण स्वास्थ्य मेले’ के रूप में उभरकर सामने आया, जहाँ ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से आए सैकड़ों मरीजों ने उपचार का लाभ उठाया।
शिविर का सफल संचालन आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक महाराज सिंह के कुशल मार्गदर्शन में किया जा रहा है। शिविर प्रभारी वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. नारायण सिंह ने बताया कि आयुर्वेद की संपूर्ण शक्ति को आमजन तक पहुँचाना ही शिविर का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि जहाँ क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा आधुनिक सर्जरी का प्रभावी विकल्प है, वहीं अग्निकर्म तत्काल दर्द निवारण करता है और स्वर्ण प्राशन आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ बनाने की मजबूत नींव रखता है। रामशाला शाहपुरा में उपलब्ध इन सुविधाओं से ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
शिविर के चौथे दिन ईटमारिया आयुष्मान आरोग्य केंद्र की चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुक्ता प्रभा ने अपने निजी खर्च पर बस भरकर ईटमारिया से 70 महिलाओं को स्वास्थ्य जांच हेतु शिविर में लाकर विभिन्न रोगों की औषधियाँ दिलवाईं। उनके इस सेवा कार्य की मोती बोर का खेड़ा स्थित श्री नवग्रह आश्रम के संस्थापक वैद्य हंसराज चौधरी ने सराहना की।
क्षार सूत्र चिकित्सा में लगातार सफलता
डॉ. विनीत जैन एवं डॉ. तरुण मीना ने बताया कि मुख्य शल्य इकाई में पाइल्स, फिशर और फिस्टुला के सफल ऑपरेशन जारी हैं। चौथे दिन तक कुल 55 सफल प्रोसीजर किए जा चुके हैं। डॉ. धर्मपाल, हिमांशु माथुर, दिलीप सोलंकी एवं पवन कुमार के अनुसार भर्ती रोगियों को शीघ्र आराम मिल रहा है।
स्वर्ण प्राशन: बच्चों के लिए इम्यूनिटी बूस्टर
शिविर में शून्य से 16 वर्ष तक के बच्चों के लिए विशेष स्वर्ण प्राशन संस्कार का आयोजन किया गया। डॉ. रिंकू सोलंकी एवं डॉ. ममता मीना ने बताया कि स्वर्ण भस्म युक्त आयुर्वेदिक बूंदों से बच्चों की स्मरण शक्ति, बुद्धि और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। चौथे दिन 190 बच्चों को स्वर्ण प्राशन कराया गया।
सामान्य चिकित्सा में डॉ. श्याम सुंदर स्वर्णकार, हेमंत सोनी एवं गोविंद सिंह गुर्जर के अनुसार वात रोग, गठिया, चर्म रोग और पेट से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या अधिक रही।
अग्निकर्म से जोड़ों के दर्द में त्वरित राहत
डॉ. सुमित गुर्जर ने बताया कि साइटिका, एड़ी दर्द और घुटनों के पुराने दर्द से पीड़ित मरीजों के लिए अग्निकर्म विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। शलाका विधि से किए गए इस उपचार से बिना दवा के मौके पर ही दर्द में उल्लेखनीय कमी देखी गई। चौथे दिन 58 रोगियों ने अग्निकर्म का लाभ लिया।
पंचकर्म से शरीर का शुद्धिकरण
डॉ. खुशबू प्रजापत ने बताया कि पंचकर्म के अंतर्गत वमन, विरेचन और बस्ती प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई तथा कई मरीजों को स्नेहन और स्वेदन द्वारा तनाव व वात रोगों से राहत प्रदान की गई।
शिविर का अवलोकन आयुर्वेद विभाग के पूर्व उपनिदेशक डॉ. जलदीप पथिक, वैद्य हंसराज चौधरी, संचिना रंगमंच के संस्थापक रामप्रसाद पारीक, वरिष्ठ पत्रकार मूलचंद पेशवानी एवं पूर्व शिक्षाविद सत्येंद्र मंडेला ने किया। सभी ने शिविर को जनस्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसकी सराहना की।


