राम ही अस्तित्व, राम ही प्राण: आलोक सेंट्रल स्कूल में गूंजा जय श्री राम; प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर सजी भव्य झांकी
✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141/
शाहपुरा। अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ के पावन अवसर पर स्थानीय आलोक सेंट्रल स्कूल में भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में जहाँ छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मन मोह लिया, वहीं वक्ताओं ने 500 वर्षों के संघर्ष और रामराज्य के महत्व पर प्रकाश डाला।
1528 से 2024 तक का संघर्ष:
मुख्य वक्ता श्री राजेश सेन ने इतिहास की परतों को खोलते हुए बताया कि किस प्रकार 1528 में बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मंदिर का विध्वंश किया था। उन्होंने मंदिर मुक्ति के लिए सदियों तक चले संघर्ष की विस्तृत जानकारी विद्यार्थियों के साथ साझा की।
राम ही सनातन के प्राण हैं: प्रधानाचार्य
प्रधानाचार्य वीरेंद्र व्यास ने अपने संबोधन में कहा, “राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि हमारा अस्तित्व हैं। रामराज्य सृष्टि के सर्वश्रेष्ठ शासन का मानक है। हमें संगठित होना होगा ताकि 1528 जैसा इतिहास फिर कभी न दोहराया जाए।” उन्होंने आगामी पीढ़ी को मंदिर की अस्मिता को अक्षुण्ण रखने का संकल्प दिलाया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां:
कार्यक्रम के दौरान तनिष्क बैरवा ने भगवान श्री राम के विग्रह स्वरूप को जीवंत किया, जिसकी सभी ने वंदना की। आरोही छिपा द्वारा दी गई नृत्य प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय कर दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन सुष्मा सेन ने किया।
इस अवसर पर विद्यालय परिवार के विष्णु खाती, फरजाना बानू, सुनीता खारोल, मुकेश तेली, धीरेंद्र पांचाल सहित सभी शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


