ओम बिरला की ‘नैतिकता’ बनाम विपक्ष का ‘हंगामा’: क्या राहुल गांधी ने लांघी संसद की मर्यादा?
अविश्वास प्रस्ताव से व्यथित स्पीकर का बड़ा फैसला; जब तक समाधान नहीं, तब तक आसन पर नहीं बैठेंगे ओम बिरला।
नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इन दिनों संसद के मौजूदा हालातों से बेहद व्यथित हैं। विपक्ष द्वारा उनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने के बाद, स्पीकर बिरला ने एक बड़ा नैतिक स्टैंड लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि जब तक इस प्रस्ताव का निपटारा नहीं हो जाता, वह सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं करेंगे।
विपक्ष के आचरण पर उठे सवाल
लेख के अनुसार, यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या राहुल गांधी और विपक्षी सांसदों ने सदन की गरिमा का सम्मान किया? हाल की घटनाओं में देखा गया कि किस तरह कांग्रेस की महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री के स्थान का घेराव किया और नारेबाजी की। इन कृत्यों के बाद सांसदों का निलंबन नियमानुसार ही नजर आता है।
अध्यक्ष की सहनशीलता की परीक्षा
ओम बिरला ने अपने कार्यकाल में जिस प्रकार विपक्ष को बोलने का मौका दिया है, वह पूर्व अध्यक्षों की तुलना में कहीं अधिक है। सदन में कागज के गोले फेंकने जैसी उद्दंडता के बावजूद उन्होंने संयम बनाए रखा।
चीन मुद्दे पर भ्रम फैलाने की कोशिश?
सदन की कार्यवाही में राहुल गांधी को बोलने से रोकने के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा गया है कि अध्यक्ष ने उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने का बार-बार आग्रह किया। हालांकि, राहुल गांधी नियमों से हटकर चीन के मुद्दे पर ऐसी चर्चा चाहते हैं, जिससे देश के हितों पर असर पड़ सकता है।


