सृजन हमेशा विनाश से भारी रहा है: शाहपुरा में मनाया गया सोमनाथ स्वाभिमान पर्व
✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
शाहपुरा | 11 मई, 2026
शाहपुरा: स्थानीय श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन बड़े हर्षोल्लास के साथ किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और नई पीढ़ी को भारतीय गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराने के उद्देश्य से आयोजित हुआ।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण है ‘स्वाभिमान पर्व’
समारोह की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. पुष्कर राज मीणा ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। अपने संबोधन में डॉ. मीणा ने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने सोमनाथ के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया:
- पौराणिक संदर्भ: चंद्रदेव ने भगवान शिव की आराधना कर शाप मुक्ति के बाद यहाँ प्रथम स्वर्ण मंदिर का निर्माण किया था। ऋग्वेद और शिव पुराण में भी इसका वर्णन मिलता है।
- ऐतिहासिक संघर्ष: डॉ. मीणा ने बताया कि वर्ष 1026 में महमूद गजनवी द्वारा किए गए भीषण आक्रमण के आज 1000 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इसके साथ ही, 11 मई 1951 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा वर्तमान मंदिर को जनता को समर्पित किए जाने के 75 वर्ष (अमृत काल) पूर्ण हुए हैं।
- सृजन की शक्ति: 17 बार नष्ट किए जाने के बावजूद आज सोमनाथ मंदिर अपनी पूरी दिव्यता के साथ खड़ा है, जो इस बात का प्रमाण है कि सृजन की शक्ति हमेशा विनाश पर भारी रहती है।
लोह पुरुष का संकल्प और आधुनिक स्वरूप
कार्यक्रम में चर्चा की गई कि आधुनिक भारत में सरदार वल्लभ भाई पटेल के दृढ़ संकल्प और जन सहयोग से सोमनाथ मंदिर का पुनरुद्धार ‘कैलाश महामेरू प्रसाद’ शैली में किया गया। आज यह पर्व पूरे भारतवर्ष में सांस्कृतिक पुनर्जागरण के उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।
युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा
विशिष्ट अतिथि प्रो. मूलचंद खटीक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि 12 ज्योतिर्लिंग भारतीय संस्कृति की अनुपम देन हैं। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व युवाओं को अपने इतिहास को समझने और राष्ट्र निर्माण की सही दिशा तय करने में मदद करता है।
उपस्थिति और आभार:
समारोह के अंत में प्रो. दिग्विजय सिंह ने सभी अतिथियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. दलवीर सिंह, प्रो. अतुल कुमार जोशी सहित महाविद्यालय के शैक्षणिक स्टाफ, कर्मचारीगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


