गहलोत की चुप्पी और रंधावा का यू टर्न बढ़ा रहा प्रदेश कांग्रेस में सस्पेंस, खाचरियावास के बाद रघु ने भी पायलट का बताया पार्टी में महत्व! 

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गहलोत की चुप्पी और रंधावा का यू टर्न बढ़ा रहा प्रदेश कांग्रेस में सस्पेंस, खाचरियावास के बाद रघु ने भी पायलट का बताया पार्टी में महत्व!

राजस्थान प्रदेश में कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं गहलोत और पायलट के बीच दूरियों को खत्म करने लिए एक पर फिर से कांग्रेस हाईकमान ने नए सिरे से तेज गति से प्रयास शुरू कर दिए जिसके तहत अब प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा न केवल विधायकों से बल्कि कांग्रेस से जुड़े बड़े नेताओं से भी सलाह मशविरे का तीन दिवसीय दौर शुरू कर दिया है। कहने को तो इसे विधायकों से वन टू वन बताया जा रहा है मगर राजनीतिक गलियारे में खबर है की रंधावा मुख्यमंत्री गहलोत और पीसीसी चीफ डोटासरा के समक्ष विधायकों से आलाकमान का कोई गुप्त संदेश दे रहे हैं! यह बात दोहराने की जरूरत नहीं की आलाकमान द्वारा पायलट को बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद भी उन्हें गरिमा पूर्ण कोई महत्व नहीं दिए जाने से अपना सब्र खोते हुए एक सप्ताह पहले जयपुर में पिछली भाजपा सरकार मैं भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जांच की मांग उठाकर एक दिवसीय धरने पर बैठे थे और कांग्रेस ने इस धरने को पार्टी विरोधी बताते हुए रोकने का काफी प्रयास किया लेकिन पायलट ने अपने पूर्व में घौषित धरने को साकार कर दिया जिसमें पहले समर्थक भारी संख्या में मौजूद रहे। जिसके तुरंत बाद से उनके दिल्ली चले जाने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रही यहां तक की रंधावा ने तो यह भी बयान दिया था कि राजस्थान को पंजाब नहीं बनने दिया जाएगा। जिसके बाद से यह कयास लगने चालू हो गए थे की पायलट के विरोध में कांग्रेस आलाकमान कोई सख्त निर्णय लेगा। लेकिन राहुल गांधी द्वारा इस मामले को गंभीरता से लेने के बाद पूरे मामले को अंतिम रूप से सुलझाए जाने के लिए एआई सीसी के महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता कमलनाथ को सचिन पायलट के साथ वार्ता कर मामला सुलझाने का संकेत दिया गया।। इसके बाद रंधावा ने यूटर्न करते हुए कहा कि जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। पायलट समर्थक बड़े नेताओं का कहना था कि जब 25 सितंबर को आलाकमान के निर्देश पर भेजे गए पर्यवेक्षकों को नकारा जाकर विधायक दल की बैठक नहीं होने देने वाले जिम्मेदार नेताओं पर ही कोई कार्रवाई नहीं हुई तो फिर पायलट पर क्यों कदम उठाया जा रहा है।अब जब विधानसभा चुनाव में कम समय को देखते हुए तथा कद्दावर मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास सहित कुछ अन्य नेताओं द्वारा पायलट के कदम को सही बताने के बाद आलाकमान ने विधायकों से वन टू वन के बहाने रंघवा के मार्फत कोई संदेश भेजा जाने की चर्चा है। रंधावा आज लगभग एक दर्जन से अधिक विधायकों से गहलोत और डोटासरा के समक्ष वन टू वन भी कर चुके हैं लेकिन वन टू वन के दौरान क्या चर्चा हुई यह प्रमाणित तौर पर सामने नहीं है आया है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गुजरात प्रभारी रघु शर्मा ने भी आज अपने बदले तेवर के तहत पीसीसी के बाहर बेरिकडिंग लगाने का विरोध किया। इसके अलावा बताया जाता है कि खाचरियावास की तरह ही रघु शर्मा ने भी पायलट के अनशन को गलत नहीं ठहराया। सचिन पायलट के अनशन को लेकर
रघु शर्मा ने कहा- बताया की ‘कांग्रेस पार्टी अपने फैसले अपने स्तर पर लेती है, सचिन पायलट पार्टी के वरिष्ठ नेता है , उनके नेतृत्व में हम ने चुनाव लड़ा और सरकार बनाई, हम सब मिलकर चुनाव लड़ेंगे, पायलट के वन टू वन में नहीं आने को लेकर रघु शर्मा ने कहा, ‘इस बात को बेवजह तूल नहीं देना चाहिए, उनका कार्यक्रम पहले से तय था और वन टू वन कार्यक्रम उसके बाद तय हुआ। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कमलनाथ और वेणुगोपाल के साथ वार्ता में सचिन पायलट ने पार्टी में अपनी गरिमा कायम करने की बात कही इसी को लेकर पायलट की इच्छा अनुसार उन्हें संतुष्ट किया जाने का कोई निर्णय लिया जाने से पहले रंधावा एक एक विधायक से रूबरू हो रहे है। सबसे बड़ी बात यह है कि विधायकों से रूबरू होने के समय गहलोत और डोटासरा भी मौजूद रहे। अब देखने वाली बात होगी कि 3 दिन की विधायकों से रायशुमारी के बाद 19 अप्रैल को संगठन के जुड़े पदाधिकारियों से बैठक मैं क्या कुछ बात निकल कर सामने आती है।

 

 

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