*हम थे जिनके सहारे… “वो” हुए ना हमारे…*
प्रशांत के जिलाध्यक्ष बनने से *कमल* की कई *पंखुड़ियां* *मुरझाई*
– *सुशील चौहान*
भीलवाड़ा. लो साब। *प्रशांत* फिर से *महासागर* हो गए। मतलब भाजपा के दूसरी बार जिलाध्यक्ष बन गए, लेकिन इस घटना से सांसद भाई साब से उम्मीद लगाए हुए आधा दर्जन दावेदारी करने वालों के चेहरे मुरझाए हुए है।
भाई अब क्या करें। जो होना था वो हो गया। मेवाड़ के स्वयं भूं मोदी अपने चेहतों के सिर जिलाध्यक्ष का ताज नहीं पहना पाए और तो और जब उन्हें लगा कि जयपुर वाले सरकार के आला ने सांसद साब को दरकिनार कर दिया तो वो जिलाध्यक्ष के उनके पक्ष के दावेदारों को बीच मझधार में छोड़ कर अपनी सांसदी का *प्रताप* दिखाने लिए प्रतापगढ़ चले गए। उन्हें लगा कि अब यहां यानी भीलवाड़ा में दाल गलने वाली नहीं हैं।
हालांकि स्वयं भूं मेवाड़ के मोदी जी ने चुनाव से एक दिन यानी रात में गुर्जरों के इष्टदेव के स्थान नाम से शहर के सौ फीट पर बने एक रिसोर्ट में बैठकर अपने खुदके बातचीत के आदान-प्रदान यंत्र से बात ना कर जिलाध्यक्ष के लिए प्रथम प्राथमिकता वाले दावेदार के मोबाइल यंत्र से अपने पक्ष के लोगों को *दनादन* बातचीत कर अपने दावेदारों की पैरवी करने का हुक्म दिया।
बताया जाता हैं कि मेवाड़ के स्वयं भूं मोदी ने दिखावे के लिए भोले-भाले कल्पेश चौधरी, नंदलाल गुर्जर और राकेश ओझा और रुप लाल जाट के *कोहनी पर जिलाध्यक्ष रुपी गुड़* लगा दिया। लेकिन उनको पता था कि इन लोगों की जयपुर में इतनी पकड़ नहीं हैं और इनके नामों पर जयपुर तो क्या भीलवाड़ा के आला नेता और भाजपा कार्यकर्ता भी राजी नहीं होंगे तो उन्हें एक तरकीब सूझी कि इस पद पर उनकी समर्थक किसी महिला को अध्यक्ष बनाया जाए ।वो ब्राह्मण समुदाय की हो तो। तुरुप का पत्ता चला। बताया जाता हैं कि कल्पेश, नंदलाल, राकेश ओझा और रुप लाल नाम तो दिखावे के लिए था मेवाड़ के स्वयं भूं मोदी ने असल में इसके लिए उन्होंने अंदर ही अंदर जिलाध्यक्ष पद के लिए अपनी सबसे विश्वसनीय आरती जी के नाम को आगे कर दिया। इसके लिए मेवाड़ के स्वयं भूं मोदी ने प्रयास किया। उधर जिलाध्यक्ष का सपना पाले आरती जी ने भी अपने फेसबुक पर *सरनेम* ही बदल लिया । अगर बिल्ली के भाग्य का छींका टूटा तो जिलाध्यक्ष के पद पर विराजमान हो जाएगी।अब वो फेसबुक पर अपने पुराने सरनेम *त्रिपाठी* पर आ गई। ताकि ब्राह्मण के नाम पर महिला जिलाध्यक्ष बन जाए। मगर यह *तरकीब* भी उस समय फेल हो गई जब प्रदेश के मुखिया ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर साफ कह दिया यह सब नहीं केवल और केवल प्रशांत मेवाड़ा ही होगा और प्रदेश के मुखिया ने सहकारिता मंत्री *दक* के माध्यम से प्रशांत के नाम का ऐलान करवा सबको *दंग* कर दिया।यह नाम सुनते ही कल्पेश चौधरी, नंदलाल गुर्जर, राकेश ओझा, आरती कोगटा (त्रिपाठी) और रुपलाल जाट के चेहरे टूटी कमल की पंखुड़ियों की तरह से मुरझा गए।
वहीं कंट्रोल बाबा व स्वयं भूं मेवाड़ के मोदी के माध्यम से राजनीति करने वाले कंट्रोल बाबा के परम भक्त का चेहरा भी *झुरा* गया। क्योंकि सबसे विनोद से बातचीत करने वाले इस सज्जन ने जिलाध्यक्ष पद के लिए अपनी *साइकिल* कंट्रोल बाबा के भरोसे छोड़ दी। इस *हास्य* के पर्याय *विनोद* को उम्मीद थी कंट्रोल बाबा राजधानी के प्रमुख पद पर विराजमान *सांई* से जिलाध्यक्ष का सफर तय कर लेंगे मगर यहां भी कंट्रोल बाबा और राजधानी के प्रमुख पद पर आसीन स्वजातीय बंधु की नहीं चली।
यानी मेवाड़ के स्वयं भूं मोदी को दिल्ली विधानसभा के शकुरगंज की जीत का सिलाह भी नहीं मिला। जिसकी जीत का उन्होंने भीलवाड़ा में खूब ढिंढोरा पिटवाया। क्योंकि सबको पता था कि दिल्ली में भाजपा की जीत केवल मोदी जी की थी किसी सांसद की इसमें *रति*भर भी भूमिका नहीं थी फिर स्वयं भूं मेवाड़ मोदी ने शकुरगंज की जीत का *सेहरा* अपने सिर बांधने का प्रयास किया। मगर यह भी काम नहीं आया।
अब उनके जिलाध्यक्ष पद के दावेदार कह रहे *हमसे का भूल हुई जो यह सजा हमका मिली*।
– *स्वतंत्र पत्रकार*
– *पूर्व उप सम्पादक, राजस्थान पत्रिका, भीलवाड़ा*
– *वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रेस क्लब, भीलवाड़ा*
– *sushil chauhan953@gmail.com*
*हम थे जिनके सहारे… “वो” हुए ना हमारे…* प्रशांत के जिलाध्यक्ष बनने से *कमल* की कई *पंखुड़ियां* *मुरझाई*
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