*‼️स्मार्ट सिटी अजमेर के आधे काम तो अदालत ने तुड़वा दिए आधे काम प्रकृति तोड़ देगी?‼️*💯
_*एलिवेटेड ब्रिज़ का टूटना तय! अब सरकार तय करे कि जान माल के साथ टूटेगा या समझदारी से!!*_🤷♂️
_*दरारों और खड्डों की जांच के लिए बनी कमेटी अयोग्य?*_😱
*✒️सुरेन्द्र चतुर्वेदी*
*अजमेर में तूफ़ान आया हुआ है और अख़बारों में भूकम्प! एलिवेटेड ब्रिज़ की एक भुजा में दरारें आने और खड्डा हो जाने पर! विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने यद्यपि इस मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए एक जांच कमेटी बैठवा दी है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए मगर मुझे नहीं लगता कि देवनानी जी को ये पता हो कि आनन फ़ानन में गठित यह कमेटी दोषी अधिकारियों की गर्दन नहीं नाप सकेगी। देवनानी जी को मैं बता दूँ अव्वल तो समिति के सदस्य ख़ुद पाक साफ़ छवि के कारण जाने पहचाने नहीं जाते। दूसरी बात ये कि दोषी अधिकारियों के आगे ये सदस्य मच्छर हैं।*💯
*दोस्तों आपको बता दूँ कि देवनानी जी ने कलेक्टर को ये स्पष्ट कर दिया था कि स्मार्ट सिटी के कामो में लिप्त किसी भी अधिकारी को इस जाँच समिति में शामिल नहीं किया जाए। इस निर्देश की पालना करते हुए कलेक्टर ने पी डब्ल्यू डी! ए डी ए ! नगर निगम! ए डी एम को जाँच समिति में शामिल किया। यहाँ सोचने वाली बात है कि जाँच समिति में शामिल स्थानीय छोटे मोटे कारिन्दे क्या इतनी तकनीकी योग्यता रखते हैं कि वे 250 करोड़ की बन्दर बांट वाले घोटाले की तह तक पहुंच पाएंगे❓😳*
*जांच करने वालों में से एक भी अधिकारी ऐसा नहीं जिसने कभी किसी पुल के निर्माण का नेतृत्व किया हो। इनमें से कुछ तो ऐसे हैं जिनके विरुद्ध ही जांचें लंबित हैं।*🫢
*बेहतर होता कि इस जांच में ब्रिज़ कॉर्पोरेशन के अधिकारी शामिल होते।*👍
*यह मामला कोई तोपदड़ा की पुलिया या रेलवे के किसी अंडर पास का नहीं! ये मामला है स्मार्ट सिटी योजना के तहत शातिर और महाभ्रष्ट गिरोह के काले कारनामों का। ये मामला है अयोग्य और जुगाड़बाज़ इंजीनियर्स की लूटपाट का! कितने शातिर अधिकारियों और नगर निगम के नेताओं ने इस पुल के निर्माण में कबाड़ योग्य सामग्री का उपयोग किया इसकी जाँच तो उच्चस्तरीय ही होनी चाहिए!*💁♂️
*हां ,ये बात अलग है कि यदि लीपा पोती कर जाँच को ठंडे बस्ते में ही डलवानी है तो ये जांच कर्ता भी बुरे नहीं।*🙋♂️
*इस ब्रिज़ के निर्माण में एक अनुमान के मुताबिक़ सौ करोड़ की बन्दर बांट हुई! ढाई सौ करोड़ की राशि का निर्माण पर ख़र्चा होना बताया गया।ज़ाहिर है कि पुल पर तो सवा सौ करोड़ ही ख़र्च हुए। इतनी राशि से यदि पुल बनाया जाएगा तो उसका धँसना लाज़मी ही है।*🤷♂️
*आपको याद होगा कि जब धंसने वाली भुजा बन कर पूरी भी नहीं हुई थी तो आवड़ तावड़ में भृष्ट अधिकारियों ने नम्बर लूटने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री से इसका उद्धघाटन ही करवा दिया।*🫢
*कमाल की बात तो यह है कि सी आर पी एफ का पुल जिस योजना बद्ध तरीके से योग्य इंजीनियर्स ने बनाया उसका एक पत्थर भी आज तक अपनी जगह से नहीं हटा। और तो और राजीव पार्क के पास दोराई के आगे बना पुल जिसे बेहद शर्मनाक तरीके से बनाया गया वह भी इस एलिवेटेड रोड़ से तो कई गुणा बेहतर है। कम से कम अपने पांवों पर तो खड़ा है।*🤷♂️
*अजमेर की सुंदरता को बर्बाद करने वाला यह ओवर ब्रिज़ तो सही मायने में इलायची बाई के शहर वासियों को बेवकूफ़ बनाने वाला खिलौना है।*😳
*यहाँ बता दूँ कि यदि इस रोड़ या पुल को जब स्टेशन के पास बनाया जा रहा था तो पास बने दस मंज़िला भवन तालेड़ा टॉवर पर दरारें आनी शुरू हो गई थीं । पुल के नीचे की ज़मीन ने तब ही धँसना शुरू कर दिया था। तब तालेड़ा भवन के मालिक ने काम रुकवा दिया था। रुका काम वापस शुरू करने के लिए बनाए जा रहे पिलर्स को बिना ठोस सर्फेस के सिर्फ़ कंक्रीट के जाल पर खड़ा कर दिया गया।*😱
*क्या जांच कमेटी पिलर्स को खुदवा कर नीचे बने सर्फेस को देखेगी❓क्या पुल में डाले गए घटिया सरियों को निकलवायेगी❓क्या गर्डर्स की मज़बूती और वैल्डिंग के स्तर की जांच होगी❓*😨
*एलिवेटेड रोड़ के घपलों की विभिन्न स्तरों पर जांच चल रही है। ख़बर तो यहाँ तक है कि लाेकायुक्त महोदय ने कुछ अधिकारियों के सम्मन भी ज़ारी कर रखे हैं। अदालत भी कई मामलों में गंभीर है।*🥺
*स्मार्ट सिटी योजना के तहत बनाए गए करोड़ों के निर्माण तो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से तोड़े जा रहे हैं। सेवन वण्डर्स! फूड कोर्ट! आदि इनमें प्रमुख हैं।💁♂️*
*एक तरफ अदालत अनावश्यक रूप से हुए करोड़ों के निर्माण तुड़वा रही है दूसरी तरफ प्रकृति कमज़ोर निर्माण ध्वस्त कर रही है। ज़रा सोचिये कि कितने करोड़ में कितने ऐसे काम हुए जो जनता के काम आएंगे❓*😯
*यदि सही हाथों से सरकार जाँच करवाए तो यह बात सामने आ सकती है कि जितने करोड़ ख़र्च हुए उनमें से 80 फ़ीसदी निर्माण तो बर्बाद ही हो गए। ऐसे में कौन कहेगा कि अजमेर स्मार्ट सिटी है❓*🙄


