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कौन पिता चाहेगा कि उसकी बेटी किसी दूसरे धर्म के युवक के साथ रोमांटिक दृश्य वाले म्यूजिक एलबम बनाए?
टेनिस खिलाड़ी राधिका की हत्या सर्व समाज के लिए सबक।
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हरियाणा के गुरुग्राम के कारोबारी दीपक यादव ने स्वीकार किया है उसी ने अपनी बेटी 25 वर्षीय राधिका की गोली मार कर हत्या की है। दीपक यादव ने पुलिस से कहा है कि अब ऐसी एफआईआर दर्ज करो ताकि मुझे अपनी बेटी की हत्या के जुर्म में फांसी की सजा मिल सके। राधिका की हत्या से जुड़ा यह मामला सर्वसमाज के लिए सबक है। स्वयं को प्रगतिशील मानने वाले कुछ लोग कह सकते हैं कि राधिका को अपना जीवन स्वतंत्रता के साथ जीने का अधिकार था। किसी भी पिता को इस तरह बेटी की हत्या नहीं करनी चाहिए। माना जा रहा है कि राधिका ने ईनामउलहक नाम के एक युवक के साथ रोमांटिक दृश्य वाला म्यूजिक एलबम बनाया और फिर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। पिता दीपक यादव ने राधिका को समझाया कि वह इस तरह के रोमांटिक सीन वाले वीडियो न बनाए क्योंकि इससे समाज में बदनामी होती है। लेकिन राधिका ने पिता की सलाह को नहीं माना और इसी का परिणाम रहा कि दीपक यादव ने अपनी बेटी के शरीर में रिवाल्वर से चार पांच गोलियां दाग दी। अब राधिका की इस हत्या पर कुछ लोगों का ऐतराज हो सकता है, लेकिन यह सवाल भी अपने आप में महत्वपूर्ण है कि कौन पिता चाहेगा कि उसकी बेटी दूसरे धर्म के किसी युवक के साथ रोमांटिक दृश्य वाला म्यूजिक एलबम बनाए? माना कि राधिका हिन्दू धर्म से संबंध रखती थी, लेकिन क्या किसी मुस्लिम या अन्य धर्म से जुड़ी बेटी यदि दूसरे धर्म के युवक के साथ रोमांटिक दृश्य के वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करे तो क्या पिता को बर्दाश्त होगा? राधिका की हत्या सिर्फ हिंदू समाज के लिए ही नहीं बल्कि मुस्लिम सहित सभी समाज के लिए सबक है। यह कहना बहुत आसान है कि बेटियों को स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। लेकिन उस पिता से पूछा जाए जिसकी बेटी दूसरे धर्म के युवक के साथ रोमांटिक दृश्य फिलमा रही हो। फिल्मों की बात छोड़ दे तो भारतीय समाज अभी इतना परिपक्व नहीं हुआ है कि बेटियां इस तरह का जीवन व्यतीत करे। ऐसा नहीं कि दीपक यादव अपनी बेटी राधिका से स्नेह नहीं करता था। हरियाणा में टेनिस खिलाड़ी बनाने के लिए दीपक यादव ने पूरा सहयोग किया। चोट के कारण जब राधिका टेनिस खेलने में असमर्थ हुई तो पिता ने ही टेनिस एकडेमी खोलने के लिए प्रोत्साहित किया। दीपक यादव चाहते थे कि राधिका हरियाणा के बच्चों को टेनिस खिलाड़ी बनाए लेकिन दीपक ने यह कल्पना कभी नहीं की थी कि राधिका टेनिस छोड़कर म्यूजिक एलबम बनाए। राधिका की हत्या सर्वसमाज के लिए सबक है। बेटियों की स्वतंत्रता पर किसी को भी ऐतराज नहीं है। आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी योग्यता का प्रदर्शन कर रही है। हजारों अभिभावकों को गर्व है कि उनकी बेटियां परचम लहरा रही है। बेटियों को ऐसा काम करना चाहिए जिससे माता पिता को गर्व हो। प्रगतिशील विचारों के कुछ लोग कुछ भी कहे, लेकिन अभी भी भारत में सामाजिक परंपराएं हैं, जिनका निर्वाह करना जरूरी है। ईनामउलहक से जुड़े लोगों को ईरान में महिलाओं पर लगी पाबंदियों को भी समझने की जरूरत है।
S.P.MITTAL BLOGGER (13-07-2025)


