📌 `*रिटर्न भरने के बाद भी मिला नोटिस न हो परेशान जवाब देना है आसान*`
*विवेक दर्शन पत्रिका*
*_डॉ राव प्रताप सिंह सुवाणा एडवोकेट_*
लोग अक्सर ये सोचते है कि ITR फाइल कर दिया यानी टैक्स से जुड़ा काम खत्म हो गया, लेकिन कई बार रिटर्न फाइल करने और वेरिफिकेशन के बाद भी नोटिस आ सकता है.
आयकर विभाग कई तरह के नोटिस भेजता है जिनकी वजह TDS में गड़बड़ी, पेंडिंग टैक्स या एक्स्ट्रा जानकारी की मांग हो सकती है. ऐसे में सही समय पर एक्शन लेना, सही जानकारी देना और जरूरत पड़ने पर एक्सपर्ट की मदद लेना बहुत जरूरी होता है, ताकि पेनल्टी से बचा जा सके और फालतू की परेशानी ना हो.
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इनमें से ज्यादातर नोटिस रूटीन होते हैं जिन्हें सही से समझकर और जवाब देकर आसानी से सुलझाया जा सकता है. अगर किसी को नोटिस आए तो घबराने की जगह इन बातों को फॉलो करने से दिक्कतों से बचा जा सकता है.
आयकर विभाग से अगर आपको भी नोटिस मिला है तो कुछ अहम काम जरूर करें। उच्च मूल्य वाले लेनदेन पर नजर रखना जरूरी है। उच्च मूल्य वाले लेनदेन व क्रेडिट कार्ड से किए गए बड़े खर्च पर भी आयकर विभाग आपको नोटिस भेज सकता है।आयकर विभाग ने हाल ही में कई करदाताओं को नोटिस भेजा है। *आयकर नोटिस मिलना चिंताजनक हो सकता है, लेकिन अक्सर इसका मतलब बड़ी मुसीबत नहीं होता।*
*कई नोटिस तो बस सामान्य संदेश होते हैं या उसमें विभाग की ओर से मांगी गई जानकारियां होती हैं।*
खासकर जब ज्यादातर चीजें ऑनलाइन हो गई हैं। ऐसा तब होता है, जब आपकी ओर से घोषित आय फॉर्म 26एएस या एआईएस (वार्षिक सूचना विवरण) में उपलब्ध आंकड़ों से मेल नहीं खाती। इनमें सामान्य कारणों से दस्तावेज गुम होना, पर्याप्त सबूत के बिना कटौती का दावा करना या कुछ ब्याज आय की सूचना नहीं देना शामिल है। इसके अलावा, उच्च मूल्य वाले लेनदेन और क्रेडिट कार्ड से किए गए बड़े खर्च भी नोटिस मिलने की वजह हो सकते हैं।
आपको भी आयकर नोटिस मिला है, तो चिंता की कोई बात नहीं है। आप नोटिस में पूछे गए सवालों का सटीक जवाब दें और इसे समय पर भेजें।अलग-अलग मकसद: आयकर कानून की विभिन्न धाराओं के तहत नोटिस जारी किए जाते हैं। हर नोटिस का अलग उद्देश्य होता है। नोटिस के बारे में क्या करें और क्या न करें? कभी भी नोटिस को नजरअंदाज न करें, हर नोटिस की एक डेडलाइन होती है जिसे मिस करने पर पेनल्टी लग सकती है.फॉर्म 26AS और AIS की मदद से अपनी इनकम और TDS डिटेल्स को मैच करें.पूरी जानकारी सही दें क्योंकि छोटी-छोटी गलती भी बड़ी जांच की वजह बन सकती है.समय रहते जवाब दें क्योंकि छोटी बात भी बाद में बड़ी परेशानी बन सकती है.अगर मामला थोड़ा पेचीदा लगे तो चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स एक्सपर्ट की मदद लें.
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*_डॉ राव प्रताप सिंह सुवाणा एडवोकेट_*


