गुरुद्वारा बंद रहने के बावजूद श्रद्धा और भक्ति से मनाया गया श्री गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाशोत्सव हरिश मतलानी के निवास पर हुआ मुख्य आयोजन, शबद-कीर्तन और लंगर से गूंजा वातावरण ✍️ *मोनू एस.छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*

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गुरुद्वारा बंद रहने के बावजूद श्रद्धा और भक्ति से मनाया गया श्री गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाशोत्सव
हरिश मतलानी के निवास पर हुआ मुख्य आयोजन, शबद-कीर्तन और लंगर से गूंजा वातावरण

✍️ *मोनू एस.छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*

शाहपुरा।
सिख धर्म के प्रथम गुरु एवं संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाशोत्सव बुधवार को शाहपुरा में अपार श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर नगर में विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु चरणों में नतमस्तक हुए।

जानकारी के अनुसार, शाहपुरा स्थित त्रिमूर्ति चौराहे के गुरुद्वारा साहिब के लंबे समय से बंद होने के कारण इस वर्ष प्रकाशोत्सव का मुख्य आयोजन हरिश मतलानी के निवास स्थान पर किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अखंड पाठ साहिब से हुआ, जिसमें नित-नेम और अरदास के बाद गुरु कृपा का स्मरण किया गया।

भक्तजन पवित्र वाणी के पाठ के दौरान भाव-विभोर होकर गुरु नानक देव जी के उपदेशों और आदर्शों को याद करते नजर आए। इसके पश्चात विशेष कीर्तन दरबार सजाया गया, जहां शबद-कीर्तन और गुरबाणी की मधुर ध्वनियों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया। श्रद्धालु “सतनाम वाहेगुरु” के जयकारों से गूंजते रहे और भक्ति में लीन रहे।

कार्यक्रम में सिंधी पंचायत अध्यक्ष मोहनलाल लखपतानी, सचिव ओम सिंधी, लीलाराम वासवानी, हरिश मतलानी, ईश्वरदास लछवानी सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने गुरु नानक देव जी के जीवन संदेशों को आत्मसात करने और समाज में प्रेम, सेवा एवं भाईचारे की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

आयोजन के पश्चात संत कंवरराम धर्मशाला में गुरु के अटूट लंगर का आयोजन किया गया। संगत और समाजजनों ने प्रेमपूर्वक लंगर ग्रहण किया, वहीं स्वयंसेवक दल सेवा में पूर्ण निष्ठा से जुटे रहे।

आखिर में सामूहिक अरदास कर विश्व शांति, मानव कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना की गई।
श्रद्धा, सेवा भावना और समर्पण से सम्पन्न यह आयोजन नगरवासियों के लिए आध्यात्मिक उत्साह और प्रेरणा का केंद्र बना रहा। हालांकि, गुरुद्वारा लंबे समय से बंद रहने के कारण श्रद्धालुओं में मायूसी भी देखने को मिली।

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