स्टोन आर्ट से संवेदनाओं तक… वर्दी में छुपा ‘कलाकार’: एसीपी पन्नालाल जांगिड़ की अनोखी दुनिया ने सबका मन जीता
कानून-व्यवस्था के सख़्त प्रहरी, पर दिल से संवेदनशील कलाकार — स्टोन आर्ट प्रदर्शनी में कला जगत ने भी माना लोहा
मोनू सुरेश छीपा। द वॉयस ऑफ राजस्थान
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शाहपुरा/जयपुर।
राजस्थान पुलिस में अपनी कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन के लिए पहचाने जाने वाले एसीपी पन्नालाल जांगिड़ इन दिनों एक अलग कारण से सुर्खियों में हैं। वर्दी के पीछे छुपा यह संवेदनशील कलाकार स्टोन आर्ट की दुनिया में ऐसा कमाल कर रहा है कि न सिर्फ पुलिस विभाग, बल्कि कला जगत भी इनके हुनर को सलाम कर रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों— पूर्व पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों— ने भी पन्नालाल जांगिड़ की अनूठी कला को सराहा और सम्मानित किया।
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कला और कर्तव्य का संगम – एक प्रेरक आदर्श
एसीपी जांगिड़ द्वारा बनाई गई स्टोन आर्ट आम कला से बिल्कुल अलग है। नदी, पहाड़ या प्रकृति में मिलने वाले सामान्य पत्थरों को जोड़कर वे अभिव्यक्ति, भावनाओं और सामाजिक संदेशों की जीवंत झलक पेश करते हैं।
उनकी रचनाओं में मानव-चरित्र, समाज, संवेदनाएँ और रिश्तों के भाव कुछ इस तरह उभरते हैं कि देखने वाला ठहरकर सोचने पर मजबूर हो जाए।
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वर्दी के पीछे छुपा कलाकार – संवेदनाओं का शिल्पकार
एसीपी पन्नालाल जांगिड़ का कहना है कि कला उनके लिए तनाव दूर करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को समझने की एक सौम्य प्रक्रिया है। पुलिस की व्यस्त और तनावपूर्ण सेवा के बीच वे अपने खाली समय में स्टोन आर्ट के जरिए मन को शांत करते हैं।
उनकी कई कलाकृतियों में समाज को जोड़ने वाला संदेश भी प्रमुखत: दिखता है—
“कुछ भी व्यर्थ नहीं, हर वस्तु में सुंदरता छिपी है।”
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जवाहर कला केंद्र में प्रदर्शनी – कला जगत हुआ प्रभावित
जांगिड़ की स्टोन आर्ट कृतियों की प्रदर्शनियों ने जयपुर के जवाहर कला केंद्र (JKK) में दर्शकों का दिल जीत लिया। कला प्रेमियों, विशेषज्ञों और दिग्गज कलाकारों ने भी उनके रचनात्मक काम की तारीफ की और इसे “अद्वितीय, अभूतपूर्व और बेहद अर्थपूर्ण कला” बताया।
उनकी कला की सरलता और मौलिकता ने हर उम्र के दर्शकों को आकर्षित किया—
• कोई इसे प्रकृति का उत्सव बताता है
• तो कोई मानव संवेदनाओं का दर्पण
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1996 में पुलिस सेवा की शुरुआत, 2008 में मिला बड़ा मोड़
एसीपी पन्नालाल जांगिड़ ने 1996 में पुलिस सेवा जॉइन की थी। वर्षों तक विभिन्न संवेदनशील पदों पर काम करने के बाद कला की तरफ उनका रुझान 2008 से तेजी से बढ़ा।
धीरे-धीरे यह शौक एक बेहतरीन कला शैली में बदल गया।
*जांगिड़ का मानना है कि—
“कला आत्मा की भाषा है, जो बिना बोले बहुत कुछ कह देती है।”*
उनकी कलाकृतियाँ न सिर्फ देखने में खूबसूरत हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और मानवीयता जगाने का काम भी करती हैं।
एसीपी पन्नालाल जांगिड़ ने यह साबित कर दिया कि वर्दी सख़्ती का प्रतीक हो सकती है, लेकिन उसके पीछे एक संवेदनशील और रचनात्मक मन भी धड़कता है।
राजस्थान पुलिस का यह ‘कलाकार अफसर’ युवाओं, कलाकारों और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है।


