संगठित और अनुशासित समाज से ही विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव: जोशी
अखिल भारतीय गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रथम शाहपुरा आगमन पर आयोजित हुआ भव्य स्वागत समारोह
✍️ *मोनू सुरेश छीपा। द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
शाहपुरा
रविवार को स्थानीय गौतम संस्थान परिसर में अखिल भारतीय गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश जोशी के प्रथम बार शाहपुरा पधारने पर समाज की ओर से भव्य स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह का आयोजन गौतम संस्थान के संरक्षक रमेश चंद्र गालरिया, अध्यक्ष द्वारका प्रसाद शर्मा तथा मार्गदर्शक अशोक पानेरी के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुजित शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि गौतम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। अतिथियों का मेवाड़ी परंपरा के अनुसार आत्मीय स्वागत किया गया। स्वागत भाषण में संरक्षक रमेश चंद्र गालरिया ने शाहपुरा क्षेत्र में समाज द्वारा संचालित गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की।
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुजित शर्मा ने सामाजिक एकता, संगठन की मजबूती तथा स्वावलंबी समाज के निर्माण के लिए सभी से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि संगठित और अनुशासित समाज से ही विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज का सदस्य होने के नाते हम सभी का दायित्व है कि सर्व समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर राष्ट्र निर्माण में ईमानदारी से योगदान दें। हमारे सामाजिक मूल्य और गौरवशाली इतिहास ही हमारी सच्ची धरोहर हैं, जिन्हें संजोकर रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अंत में अध्यक्ष द्वारका प्रसाद शर्मा ने समाज की आगामी योजनाओं की जानकारी देते हुए आगंतुक अतिथियों एवं उपस्थित समाजजनों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन युवक संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष अविनाश शर्मा ने किया।
कार्यक्रम में प्रदेश सचिव अनिल शर्मा, टीओ प्रियकांत शर्मा, मुकेश श्रोत्रिय, पार्षद भगवती प्रसाद शर्मा, दिनेश कुमार शर्मा, पवन कुमार शर्मा, पंकज उपाध्याय, पूर्व पार्षद सुभाष व्यास, नरेश व्यास, अशोक चाष्टा, राजेन्द्र व्यास तहनाल, जयप्रकाश शर्मा, दिनेश शर्मा, युवक संघ के केशव सपूत, गौतम तिवाड़ी, अक्षत शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


