पाली में शौर्य और एकता की प्रतीक ऐतिहासिक गांवशाही गेर निकली, आज खुलेंगे बाजार
चंद्रग्रहण के चलते बदला कार्यक्रम, विश्वकर्मा मंदिर से जुम्मा मस्जिद तक पुष्पवर्षा के बीच गेर का स्वागत
मोनू सुरेश छीपा
रिपोर्ट – घेवरचन्द आर्य
पाली। शहर सहित जिलेभर में होली दहन के बाद मंगलवार और बुधवार को रंगोत्सव की धूम रही। पाली शहर में शौर्य और एकता की प्रतीक ऐतिहासिक गांवशाही गेर बुधवार शाम को निकाली गई। प्रशासन और शांति समिति की मौजूदगी में गेर शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई। आज शहर के बाजार पुनः खुलेंगे।
सोमवार को होली दहन के बाद मंगलवार को विभिन्न समाजों ने गेर निकालकर एक-दूसरे के घर जाकर होली की शुभकामनाएं दीं। चंद्रग्रहण के कारण कुछ समाजों ने बुधवार को होली खेली। सिरवी, घांची, माली, जांगिड़ सहित विभिन्न समाजों ने पारंपरिक गेर निकाली। समाजों में नवजात बच्चों की ‘ढूंढ’ की रस्म भी निभाई गई। गली-मोहल्लों में लोगों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर पर्व की खुशियां साझा कीं।
जोधपुरिया बास से शुरू हुई गांवशाही गेर
जिला प्रशासन और शांति समिति ने मंगलवार को गेर का कार्यक्रम तय किया था, लेकिन चंद्रग्रहण के चलते कुछ समाजों की असहमति के बाद बुधवार शाम 5 बजे जोधपुरिया बास की बारी के पास समाजजन एकत्रित हुए। शाम 6 बजे गेर ने विधिवत रूप लिया और प्यार चौक की ओर बढ़ी। लगभग आधा किलोमीटर दूर स्थित पहुंचने में गेर को करीब दो घंटे लगे।
मंदिर में आरती के पश्चात गेर जब के सामने पहुंची, तो मुस्लिम समाज के शहर काजी, जांगिड़ समाज के अध्यक्ष और अन्य गणमान्य नागरिकों ने पुलिस अधिकारियों एवं गेर नेतृत्व कर रहे समाजजनों का माल्यार्पण व पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इसके बाद गेर को विधिवत पास घोषित किया गया।
जोधपुरिया बास की बारी से जुम्मा मस्जिद तक भारी पुलिस जाप्ता तैनात रहा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
सुबह से दोपहर तक रंगों की धूम
बुधवार सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक पांच वर्ष के बालक से लेकर 65 वर्ष तक के बुजुर्ग, महिलाएं और युवा रंग-गुलाल व पानी की धार के साथ होली खेलते नजर आए। युवाओं ने अपने-अपने समूहों में सेल्फी लेकर उत्सव की खुशी साझा की।
पाली शहर के बाहरी क्षेत्रों—चिमनपुरा, पुराना और नया हाउसिंग बोर्ड, अशोक नगर, रामदेव रोड, सिंधी कॉलोनी—तथा भीतरी भागों में पानी दरवाजा, सराफा बाजार, धानमंडी, सोमनाथ और सूरज पोल क्षेत्र में रंगों का उल्लास देखने को मिला। घरों की छतों और बालकनियों से बच्चों ने राहगीरों पर रंग भरे गुब्बारे फेंककर उत्साह प्रकट किया।
दोपहर बाद लोग स्नान कर एक-दूसरे के घर बधाई देने पहुंचे। गृहस्थों ने अतिथियों का मिठाई, फल, शर्बत, ठंडाई और आइसक्रीम से स्वागत कर पारंपरिक आतिथ्य निभाया।
पाली की ऐतिहासिक गांवशाही गेर ने एक बार फिर सामाजिक सौहार्द, शौर्य और एकता का संदेश दिया।


