*फूलडोल महोत्सव के बीच रामस्नेही सम्प्रदाय में विवाद
संत दिग्विजयराम के प्रवेश को लेकर संत समाज और आचार्य पीठ आमने-सामने, कार्यक्रमों के बहिष्कार की घोषणा*
✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
शाहपुरा, 8 मार्च।
260वें फूलडोल महोत्सव (वि.सं. 2082 / ई.सं. 2026) के दौरान रामस्नेही सम्प्रदाय में संत समाज और आचार्य पीठ के बीच विवाद गहरा गया है। संत दिग्विजयराम के प्रवेश को लेकर उत्पन्न हुए इस विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। इसके चलते संत समाज ने महोत्सव के कुछ कार्यक्रमों के बहिष्कार की घोषणा कर दी है।

जानकारी के अनुसार 25 फरवरी 2026 को हुई बैठक में आचार्य प्रवर ने चित्तौड़ के व्यवसायी रमेश ईनाणी हत्याकांड के मुख्य आरोपी रामतराम के शिष्य संत दिग्विजयराम को वर्तमान फूलडोल महोत्सव में आने से रोकने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद दिग्विजयराम चैत्र कृष्ण तृतीया की प्रातःकालीन बेला में बारहदरी पहुंच गए।

इस पर संत समाज ने आचार्य श्री से दिग्विजयराम को वापस भेजने का आग्रह किया, लेकिन आदेश नहीं दिए जाने पर संत समाज ने लाल चौक में धरना शुरू कर दिया। इसके बाद संतों और गृहस्थों के प्रतिनिधिमंडल ने आचार्य श्री से समाधान की मांग की। दिनभर चली चर्चाओं के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।
बाद में भेख भण्डारी द्वारा सम्प्रदाय के लेटरपेड पर संत दिग्विजयराम को एक वर्ष के लिए भेख से बाहर करने का निर्णय जारी किया गया। हालांकि दिग्विजयराम के समर्थक संतों और गृहस्थों के दबाव के बाद आचार्य श्री ने इस निर्णय से असहमति जताते हुए इसे स्वतः निरस्त बताया। इस संबंध में आचार्य श्री के वीडियो भी सोशल मीडिया और मीडिया में प्रसारित हुए।

बताया जा रहा है कि इस घटनाक्रम से भेख भण्डारी और भेख भगवान आहत हैं तथा आचार्य पीठ पर भाई-भतीजावाद और हठधर्मिता के आरोपों को लेकर संत समाज में रोष व्याप्त है। इसी कारण संत समाज ने पंचमी के दिन फूलडोल महोत्सव के मध्याह्न बाद होने वाले कार्यक्रमों के बहिष्कार की घोषणा की है।
संत समाज ने लगाए गंभीर आरोप
पत्रकार वार्ता में संत समाज के प्रतिनिधियों ने आचार्य श्री रामदयाल महाराज पर संप्रदाय में जातिवाद फैलाने, संप्रदाय की संपत्तियों को बेचने तथा संतों के साथ भेदभाव करने के आरोप लगाए। पत्रकार वार्ता में संत सुखराम बाड़मेर, संत संतराम पुष्कर और बड़े साद संत नरपत राम उदयपुर सहित अन्य संत उपस्थित रहे। उन्होंने दिग्विजयराम को बर्खास्त करने की मांग करते हुए आचार्य के चातुर्मास सहित आगामी आयोजनों के बहिष्कार की भी घोषणा की।
भावुक माहौल में रामनिवास धाम से विदा हुए संत
पत्रकार वार्ता के बाद 50 से अधिक संतों ने बारहदरी में दंडवत प्रणाम कर भावुक वातावरण में रामनिवास धाम से विदाई ली। संतों ने आंसुओं के साथ अपनी पीड़ा व्यक्त की, जिससे वहां मौजूद अनुयायी भी भावुक हो उठे।
पीड़ित परिवार ने मांगा न्याय
चित्तौड़ के व्यवसायी रमेश ईनाणी की हत्या के बाद उनके पुत्र शुभम ईनाणी शाहपुरा स्थित रामनिवास धाम पहुंचे और आचार्य रामदयाल महाराज से मिलकर न्याय की मांग की। आचार्य श्री ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए आश्वस्त किया कि सम्प्रदाय उनके साथ है।


