श्री बाड़ी माता के दर्शन से मन को सुकून मिलता है: सांसद मंजू शर्मा
* शक्तिपीठ बाड़ी माता तीर्थ धाम पर श्रीमद् देवी भागवत कथा का तीसरा दिन
* कथा व्यास हंसानंद गिरी महाराज ने श्रवण कराई भीष्म पितामह, पांडु और कुरुवंश की पावन कथा
गुलाबपुरा (रामकिशन वैष्णव)
निकटवर्ती प्रमुख शक्तिपीठ बाड़ी माता तीर्थ धाम पर आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा के मुख्य अतिथि के रूप में जयपुर सांसद मंजू शर्मा ने शिरकत की। इस अवसर पर समिति द्वारा सांसद शर्मा का भव्य स्वागत व सम्मान किया गया।
तीर्थ धाम की महिमा का बखान करते हुए सांसद मंजू शर्मा ने कहा कि—
”श्री बाड़ी माता तीर्थ धाम एक अलौकिक शक्तिपीठ है। यहां आने मात्र से ही भक्तों के मन को परम शांति और असीम सुकून की अनुभूति होती है।”
श्रीमद् देवी भागवत भव बंधन से पार लगाने वाली गंगा: पूज्य गुरुदेव
कथा व्यास पूज्य गुरुदेव श्री हंसानंद जी गिरी महाराज ने तीसरे दिन भीष्म पितामह, पांडु वंश और कुरुवंश की पावन कथाओं का रसपान कराया। महाराज श्री ने व्यासपीठ से कहा कि कलियुग के समस्त भक्तों के कल्याण के लिए ही श्रीमद् देवी भागवत का अवतरण हुआ है। यह कथा रूपी गंगा मनुष्यों को सांसारिक भव बंधन के आवागमन से पार लगाती है।
पितृ मुक्ति का सबसे सरल उपाय
कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए पूज्य गुरुदेव ने बताया कि:
- राजा परीक्षित की मुक्ति के लिए उनके पुत्र जन्मेजय ने श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन करवाकर अपने पिता को मोक्ष प्रदान करवाया था।
- कलियुग में पितरों की आत्मशांति और मुक्ति के लिए देवी भागवत कथा का श्रवण व आयोजन सबसे सहज और सरल उपाय है।
जन्मेजय के नागदाह यज्ञ का प्रसंग सुनाया
व्यास जी ने कथा में राजा जन्मेजय द्वारा अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए किए गए नागदाह यज्ञ का रोचक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि यज्ञ में अनेकों सर्पों की आहुतियां दी जा रही थीं, तभी आस्तिक मुनि ने वहां पहुंचकर इस महाविनाशक यज्ञ को रुकवाया। इसके बाद मुनि ने जन्मेजय को श्रीमद् देवी भागवत कथा श्रवण कराई, जिससे उन्हें भगवती की विशेष कृपा प्राप्त हुई और उनका जीवन धन्य हो गया।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भारी भीड़
धार्मिक भजनों और माता के जयकारों से पूरा बाड़ी माता परिसर गुंजायमान रहा। इस दिव्य संगीतमय कथा में गुलाबपुरा सहित आस-पास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालु, भक्तगण और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।


