भीलवाड़ा: श्री सीताराम सत्संग भवन ट्रस्ट ने धर्मशाला में लगाया 150 KW का सोलर प्लांट, ₹45 लाख की लागत से बिजली में आत्मनिर्भरता
✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
भीलवाड़ा, 30 मई:
राजस्थान के भीलवाड़ा में सामाजिक सरोकार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय पहल सामने आई है। क्षेत्र की अग्रणी सामाजिक संस्था श्री सीताराम सत्संग भवन ट्रस्ट ने महात्मा गांधी आरोग्य सदन परिसर में नवनिर्मित ‘श्री सीताराम धर्मशाला’ को सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भर बना दिया है। ट्रस्ट द्वारा यहाँ 150 किलोवाट (KW) क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया गया है।
₹45 लाख की लागत, आवास फाइनेंस का सहयोग
संस्थान के अध्यक्ष रामपाल सोनी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹45 लाख है। इस पुनीत कार्य में आवास हाउसिंग बोर्ड (आवास फाइनेंस) की टीम ने वित्तीय सहयोग प्रदान कर कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। श्री सोनी ने इसके लिए आवास फाइनेंस की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।
प्रतिदिन 600 यूनिट बिजली का होगा उत्पादन
तकनीकी विवरण साझा करते हुए संस्था के मंत्री राजेश जैन एवं कोषाध्यक्ष लक्ष्मी नारायण तोषनीवाल ने बताया:
”यह सोलर प्लांट प्रतिदिन औसतन 600 यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा। इससे धर्मशाला की बिजली संबंधी निर्भरता ग्रिड पर बेहद कम हो जाएगी और संचालन लागत (Operational Cost) में भारी कमी आएगी।”
मरीजों और असहाय लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अनुसार, सोलर प्लांट से होने वाली इस वित्तीय बचत का सीधा लाभ धर्मशाला में आश्रय लेने वाले निर्धन एवं असहाय लाभार्थियों को मिलेगा। बिजली का खर्च घटने से यहाँ रुकने वाले लोगों के लिए सेवा शुल्क (रूम रेंट/चार्जेस) को कम किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, धर्मशाला प्रबंधन ने सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए एक ‘फीडबैक सिस्टम’ भी लागू किया है, जिसके तहत हर लाभार्थी से फीडबैक फॉर्म भरवाया जाता है ताकि व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार किया जा सके।
पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकार
गौरतलब है कि श्री सीताराम सत्संग भवन ट्रस्ट भीलवाड़ा में लंबे समय से गौ-सेवा, कबूतर-सेवा और अनवरत हरि कीर्तन जैसे आध्यात्मिक व सामाजिक कार्यों में संलग्न है। अब ग्रीन एनर्जी (सौर ऊर्जा) को अपनाकर ट्रस्ट ने पर्यावरण संरक्षण का भी एक बड़ा संदेश दिया है।
इस उद्घाटन व आभार कार्यक्रम के दौरान शहर के कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे, जिनमें श्री गोपाल राठी, राधेश्याम चेचानी, कैलाश कोठारी, जगदीश कोगटा, रमेश राठी, सत्यनारायण मुन्दडा, महावीर समदानी, लक्ष्मी नारायण काबरा, महेश देवपुरा, सुशील मारोटिया, गोपाल नारानीवाल, सुरेश कचोलिया और प्रहलाद सोनी सहित अन्य प्रबुद्ध जन शामिल हैं।


