शाहपुरा (मोनू सुरेश छीपा – द वॉयस ऑफ राजस्थान)। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ एन्टी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। नागौर जिले में साल 2018 में दर्ज हुए करोड़ों रुपए के बहुचर्चित आंगनबाड़ी पोषाहार घोटाले में एसीबी ने 8 साल बाद एक साथ 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। गिरफ्तार आरोपियों में महिला पर्यवेक्षक, असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर (AAO) और कई संविदा कर्मी शामिल हैं।
पूछताछ के बहाने मुख्यालय बुलाकर दबोचा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एसीबी मुख्यालय ने इस महाघोटाले की जांच के सिलसिले में 9 महिला और 10 पुरुष अधिकारियों व कर्मचारियों को नागौर मुख्यालय पर पूछताछ के लिए तलब किया था। लंबे समय तक चली कड़ाई से पूछताछ और दस्तावेजों की स्क्रूटनी के बाद, जब आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले, तो एसीबी टीम ने देर न करते हुए सभी 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
फर्जी चालान और बिल बनाकर उठाई थी करोड़ों की राशि
इन सभी आरोपियों पर आरोप है कि इन्होंने आपसी मिलीभगत कर आंगनबाड़ी केंद्रों पर बांटे जाने वाले पोषाहार के नाम पर फर्जी चालान और फर्जी बिल तैयार किए। बिना किसी पोषाहार आपूर्ति के कागजों में ही करोड़ों रुपए का हेरफेर कर सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई गई। साल 2018 में मामला दर्ज होने के बाद से ही एसीबी इसकी कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई थी।
कुचामन सिटी और परबतसर से हुई ये प्रमुख गिरफ्तारियां
एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कुचामन सिटी और परबतसर ब्लॉक के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं:
- कुचामन सिटी (06 गिरफ्तारियां): यहां से महिला पर्यवेक्षक हेमा अग्रवाल, गीता वर्मा, मनीष शेखावत, अंजू शर्मा सहित संविदा कर्मी राजेंद्र प्रसाद दायमा और विजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया है।
- परबतसर (04 गिरफ्तारियां): यहां से चार कार्मिकों खूबचंद भाकर, मूली देवी, संतोष देवी और कमल किशोर को एसीबी ने अपनी कस्टडी में लिया है।
- इनके अलावा कुल मिलाकर 9 महिलाओं और 10 पुरुषों सहित 19 लोगों पर गिरफ्तारी की गाज गिरी है।
एसीबी की इस बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक के बाद नागौर और प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग में खलबली मची हुई है। माना जा रहा है कि इस मामले में अभी कुछ और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


