श्री बालाजी मंदिर मे देवशयनी एकादशी की कथा व महाआरती की गई।
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गुलाबपुरा (रामकिशन वैष्णव) श्री संकट मोचन बालाजी मंदिर सब्जी मंडी मे देवशयनी एकादशी की कथा सुनाई व महाआरती की गई। रविवार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के रूप में मनाई गई। विजय प्रकाश शर्मा एडवोकेट ने ग्यारस की कथा कही देव शयनी एकादशी व्रत कथा का, वर्णन करते हुए बताया की विष्णु भगवान एक रूप से बैकुंठ में निवास करते हैं, एक रूप से राजा बलि के पहरा देते हैं, इस दिन से चातुर्मास की विधिवत शुरुआत हुई जो देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं और अगले 4 महीने तक सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। इस अवधि में विवाहित संस्कार, गृह प्रवेश, मुंडन, दीक्षा ग्रहण जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इस समय को चातुर्मास कहा जाता है। बालाजी मंदिर महंत पवन दास वैष्णव ने बताया है कि प्रातः 9:15 बजे देवशयनी एकादशी की कथा की , आरती हुई प्रसाद वितरण किया, संयम साधना शिव आराधना का समय है। चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु सृष्टि का संचालन भगवान शिव को सौंप देते हैं। इसलिए सावन मास में शिव पूजन विशेष फलदाई होता है। इस अवधि को आत्मिक शुद्ध साधना व्रत कथा भागवत कीर्तन और सत्संग के लिए उत्तम समय माना जाता है। इस दौरान बालाजी महिला मंडल की सदस्य सहित भक्तजन मौजूद थे।
श्री बालाजी मंदिर मे देवशयनी एकादशी की कथा व महाआरती की गई।
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