परम भक्त संत नरसी मेहता जयंती श्रद्धा–सुमन के साथ मनाई, भक्तिभाव से गुंजा गोविंददेव मंदिर
भजनों, कीर्तन और संत नरसी जी के जीवन प्रसंगों ने भक्तों को किया भावविभोर—आंखें नम, हृदय भक्तिभाव से सराबोर
✍️ मोनू सुरेश छीपा। द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
शाहपुरा। सदर बाजार स्थित भगवान श्री गोविंददेव मंदिर में प्रातःकालीन सत्र के दौरान परम भक्त, परम संत नरसी मेहता जी की जयंती अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। संत नरसी जी की भगवान के प्रति अटूट निष्ठा, दृढ़ विश्वास और पूर्ण समर्पण को स्मरण करते हुए मंदिर परिसर दिव्य भक्ति-रस से महक उठा।
कार्यक्रम में पंडित महावीर प्रसाद शर्मा ने नरसी मेहता जी के जीवन का प्रेरक परिचय देते हुए बताया कि गुजरात के संत कवियों में नरसी मेहता जी का स्थान सर्वोच्च है। उनका जन्म 1414 में जूनागढ़ के पास तालुजा ग्राम में एक नागर ब्राह्मण परिवार में हुआ। बचपन में माता-पिता के निधन के बाद दादी ने उनका पालन-पोषण किया, जबकि परिवार में प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी। दादी के साथ शिव मंदिर में जाने पर संत के आशीर्वाद से वे बोलने–सुनने लगे।
पंडित शर्मा ने आगे कहा कि भगवान शिव की आराधना से प्रसन्न होकर उन्होंने नरसी जी को वरदान दिया, लेकिन नरसी जी ने “मुझे और कछु न चाहिए, श्री राधाकृष्ण मिलाइऐ” निवेदन किया। उनके अटूट प्रेम से प्रसन्न होकर ठाकुर जी ने उन्हें चार उपहार—टोपी, माला, करताल और केदार राग—प्रदान किए और वचन दिया कि इस राग में पुकारने पर वे तुरंत उपस्थित होंगे। यही नहीं, ठाकुर जी ने अपने परम भक्त के लिए 52 बार अवतार लेकर उन्हें संकटों से उबारा।
इस अवसर पर भक्तिमति मंजु शर्मा द्वारा प्रस्तुत भजन “कन्हैया प्यारा दर्शन दिखा जा रे…” ने वातावरण को भावुक कर दिया। भक्तिमति सुनीता मूंदड़ा ने “मै तो शिव ही शिव को ध्याऊं…” भजन प्रस्तुत किया, जबकि पुजारी पंडित महावीर प्रसाद शर्मा ने नरसी जी का रचित और महात्मा गांधी का प्रिय भजन “वैष्णव जन तो तेने कहिए…” गाकर सभी को भक्ति में मग्न कर दिया।
कार्यक्रम में भक्त राधेश्याम, सूर्यप्रकाश झंवर, द्वारका प्रसाद मूंदड़ा, नंदलाल सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मातृशक्ति में विमला, आशा, निर्मला, सुनीता मूंदड़ा, विमला डोडिया, संतरा घीया, मंजु, सीता शर्मा, रुक्मणी झंवर एवं अन्य भक्तों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
संत नरसी मेहता जयंती का यह आयोजन भक्तिभाव, भजनों और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बन गया, जिसने सभी को भाव-विभोर कर दिया।


