श्री संकट मोचन बालाजी मंदिर बालाजी चौक मे मोक्षदा एकादशी व्रत कथा हुई।
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गुलाबपुरा (रामकिशन वैष्णव) श्री संकटमोचन बालाजी मंदिर मे
मोक्षदा एकादशी व्रत की कथा हुई। महंत पवन दास वैष्णव ने बताया की सोमवार को एकादशी पर शुभ मुहूर्त मे पूजा अर्चना एवं व्रत कथा कही व महत्व बताया हुए कहा की एकादशी व्रत मे साबूदाना, चावल, एवं सेव खाना वर्जित है, शुभ मुहूर्त=मोक्षदा एकादशी 30 नवम्बर रात्रि 9 बजकर 30 मिनिट से शुरू हुई व समापन 1 दिसम्बर शाम 7 बजकर 2 मिनिट पर हुआ। बालाजी मंदिर महंत वैष्णव ने बताया है कि मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी मोक्षदा एकादशी कहलाती हैं। इस व्रत के प्रभाव से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान श्री कृष्ण जी ने मोक्षदा एकादशी के दिन ही अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। अतः इस तिथि को गीता जयंती भी कहा जाता है। यह एकादशी मोक्ष प्रदान करने वाली है, सब पापों का हरण करनेवाली एकादशी है।‘मोक्षदा’ एकादशी बड़े-बड़े पातकों का नाश करने वाली है। पितरों को, इस एकादशी का पुण्य दान करने से, मोक्ष की प्राप्ति होती है। वे नरक की यातनाओं से मुक्त हो स्वर्गलोक प्राप्त करते हैं। जो इस कल्याणमयी ‘मोक्षदा’ एकादशी का व्रत करता है, उसके पाप नष्ट हो जाते हैं और मरने के बाद वह मोक्ष प्राप्त कर लेता है। यह मोक्ष देने वाली ‘मोक्षदा’ एकादशी मनुष्यों के लिये चिन्तामणि के समान समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली है। इस महात्म्य के पढ़ने सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। श्री विष्णु जी की मूर्ति, वस्त्र (लाल एवं पीला), पुष्प, पुष्पमाला, नारियल, सुपारी, अन्य ऋतुफल, धूप, दीप, घी, पंचामृत दुध,दही,घी,शहद व शक्कर का मिश्रण, अक्षत, तुलसी दल, चंदन, कलश। कथा के साथ आरती हुई एवं पंचामृत का प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर बालाजी महिला मंडल अध्यक्ष रेखा भाटिया, पारस वैष्णव, शांति गर्ग आदि महिलाएं मौजूद थी।
श्री संकट मोचन बालाजी मंदिर बालाजी चौक मे मोक्षदा एकादशी व्रत कथा हुई।
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