हरि शेवा उदासीन आश्रम में भक्तमाल कथा का शुभारंभ
भगवत् भक्ति और संतों का चरित्र ही जीवन का वास्तविक कल्याण : जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ
✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
भीलवाड़ा, 26 मई।
के तत्वावधान एवं तथा महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के सानिध्य में आयोजित पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) महोत्सव के अंतर्गत पांच दिवसीय “भक्तमाल कथा” का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा में ज्योतिर्मठ आवांतर भानपुरा पीठ के पीठाधीश्वर के श्रीमुख से अमृतमयी कथा श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम परिसर में उमड़े। पूरा वातावरण हरिनाम संकीर्तन एवं भक्ति रस से सराबोर हो उठा।
कथा के प्रथम दिवस का शुभारंभ आश्रम के महामंडलेश्वर एवं संत समाज द्वारा व्यासपीठ के विधि-विधान से पूजन तथा जगद्गुरु शंकराचार्य जी के भव्य स्वागत के साथ हुआ।
इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज ने भक्तमाल ग्रंथ के मंगलाचरण “भक्त भक्ति भगवंत गुरु चतुर नाम वपु एक” की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान, उनकी भक्ति, स्वयं भक्त तथा सही मार्ग दिखाने वाले गुरु — ये चारों नाम और स्वरूप से भिन्न प्रतीत होते हैं, किन्तु तत्वतः एक ही हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धा एवं निष्कपट भाव से संतों और भक्तों के चरित्र का श्रवण करने से जीवन के समस्त विघ्न एवं संकट स्वतः दूर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि भवसागर से पार होने का सबसे सरल एवं श्रेष्ठ मार्ग भगवद् आराधना तथा भक्तों के यश का गान है। चारों वेद, पुराण एवं इतिहास भी इसी सत्य की पुष्टि करते हैं कि ईश्वर एवं उनके भक्त दोनों ही परम वंदनीय और पूजनीय हैं।
कथा के दौरान श्रीप्रियादास जी कृत “भक्तिरसबोधिनी टीका” के माध्यम से महाप्रभु के चरणों का ध्यान एवं हरिनाम संकीर्तन की महिमा का वर्णन किया गया। सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे तथा पूरा पांडाल भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो गया।
पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित यह विशेष भक्तमाल कथा आगामी 30 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित होगी। प्रवचन के अंत में महाआरती की गई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।
आज आयोजित विष्णु यज्ञ में डॉ. प्रकाश थावानी एवं अजमेर के दौलतानी परिवार ने आहुतियां दीं तथा हरि सीधेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक किया। पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत आश्रम में प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, रुद्राभिषेक, संकीर्तन, गंगा आरती एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो रहे हैं।
आश्रम के संत मायाराम एवं संत गोविन्दराम ने सनातन धर्मावलंबियों से पुरुषोत्तम मास में भीलवाड़ा में बह रही धर्मगंगा की त्रिवेणी का लाभ लेने का आग्रह किया।


