शाहपुरा। भारतीय इतिहास की महान शासक, दूरदर्शी और कुशल प्रशासक राजमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती रविवार को तस्वारिया ईटमारिया में अत्यंत हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
न्याय और राष्ट्र निर्माण की मिसाल हैं राजमाता
कार्यक्रम के दौरान मोहन जी गाडरी ने मालवा साम्राज्य की महारानी अहिल्याबाई होल्कर के प्रेरक जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 18वीं सदी में राजमाता ने जिस प्रकार अपनी न्यायप्रियता, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभाई, वह आज की पीढ़ी के लिए भी एक बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर केवल एक शासक नहीं, बल्कि एक युगदृष्टा थीं, जिन्होंने जन-कल्याण को अपना सर्वोपरि धर्म माना।
संस्कृति के संरक्षण का संकल्प
वक्ताओं ने याद दिलाया कि राजमाता अहिल्याबाई होल्कर ने काशी से लेकर रामेश्वरम तक हज़ारों मंदिरों, घाटों और धर्मशालाओं का जीर्णोद्धार करवाकर भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म को संजोने का महती कार्य किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर स्थानीय सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने राजमाता की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
आयोजन को सफल बनाने में विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधियों का योगदान रहा। कार्यक्रम में गोपाल गाडरी, कालु बैरवा, अर्जुन गाडरी, सुरेश माली, सांवर शर्मा, बजरंग गाडरी, उदय गाडरी, हरि शर्मा, हरिकिशन माली, महावीर माली, देवराज शर्मा, सम्पत जी, रामस्वरूप, किशन माली, रघुवीर शर्मा, मुकेश माली और शंकर गाडरी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


