भागवत कथा मानव को मोह से मोक्ष की ओर ले जाती है: स्वामी अशोकानंद जी महाराज
✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
भीलवाड़ा, 1 जून: सनातन सेवा समिति और हरि शेवा उदासीन आश्रम द्वारा पुरुषोत्तम मास के पावन उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ आज भक्तिमय वातावरण में हुआ। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के सानिध्य में आयोजित इस कथा के प्रथम दिन व्यासपीठ पर विराजमान कथाव्यास स्वामी अशोकानंद जी महाराज (जबलपुर) ने श्रीमद्भागवत महापुराण के अद्भुत महात्म्य और राजा परीक्षित-शुकदेव जी महाराज के प्रेरक प्रसंगों का सविस्तार वर्णन किया।
भागवत कथा: वेदों और शास्त्रों का सार
कथा के शुभारंभ में विधि-विधान से भागवत जी को व्यासपीठ पर प्रतिष्ठित किया गया। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन ने मुख्य व्यास स्वामी अशोकानंद जी महाराज का अभिनंदन किया।
कथा का वाचन करते हुए स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने कहा, “श्रीमद्भागवत महापुराण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि समस्त वेदों और उपनिषदों का सार है। यह साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वाङ्मय स्वरूप है। इसके श्रवण, मनन और चिंतन से मानव हृदय में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उदय होता है। यह कलियुग में मोक्ष प्रदान करने वाली दिव्य ज्ञानगंगा है, जो जीव को परमात्मा से जोड़ने का सेतु है।”
राजा परीक्षित का प्रसंग और जीवन का सार
स्वामी जी ने राजा परीक्षित के प्रसंग को उद्धृत करते हुए बताया कि जब राजा परीक्षित को ज्ञात हुआ कि वे सातवें दिन मृत्यु को प्राप्त होंगे, तो उन्होंने मोह-माया का त्याग कर गंगा तट पर आत्म-कल्याण का मार्ग खोजा। शुकदेव जी महाराज के अमृतमयी मुखारविंद से सात दिनों तक भागवत कथा श्रवण कर उन्होंने परम ज्ञान और मोक्ष प्राप्त किया। यह संवाद हमें सिखाता है कि जीवन का प्रत्येक क्षण सत्संग और धर्ममय आचरण में व्यतीत होना चाहिए।
आश्रम में गूंजे जयघोष, हुआ विष्णु यज्ञ
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में पूरी तरह सराबोर नजर आए। आश्रम परिसर भगवान के जयघोष और भजनों से गूंज उठा। आज के कार्यक्रम में चांदमल सोमानी ने विष्णु यज्ञ में आहूतियां दीं तथा महादेव का रुद्राभिषेक किया।
पुरुषोत्तम मास में धर्मगंगा की त्रिवेणी
पुरुषोत्तम माह महोत्सव के तहत हरि शेवा उदासीन आश्रम में प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, रुद्राभिषेक, संकीर्तन और गंगा आरती जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं। आश्रम के संत मायाराम और संत गोविन्दराम ने भीलवाड़ा के सभी धर्मप्रेमियों से आग्रह किया है कि वे इस पावन महीने में आयोजित इन धार्मिक कार्यक्रमों का लाभ उठाकर अपना जीवन कृतार्थ करें। इस अवसर पर संत ईशान राम, संत सुयज्ञ राम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


