महंत मोहनशरण शास्त्री को इंडिया बुक अवार्ड का समर्पण -महामंडलेश्वर ने संस्कृत भाषा को कक्षा प्रथम से अनिवार्य अध्ययन अध्यापन की मांग की ✍️ *मोनू नामदेव।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*

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महंत मोहनशरण शास्त्री को इंडिया बुक अवार्ड का समर्पण

-महामंडलेश्वर ने संस्कृत भाषा को कक्षा प्रथम से अनिवार्य अध्ययन अध्यापन की मांग की

✍️ *मोनू नामदेव।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*

भीलवाड़ा। निम्बार्क वैदिक संस्कृत समिति भीलवाड़ा संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसारार्थ विगत 16 वर्षों से निरन्तर कार्य कर रही है। संस्था ने बीते 16 वर्षों में प्रदेशभर के 2 लाख 28 हजार 918 छात्र छात्राओं को संस्कृत आन्दोलन जोड़कर बड़ी उपलब्धि हासिल की, इसी उपलब्धि के चलते 6 फरवरी 2025 को संस्था का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस 2025 में दर्ज हुआ। पंकज आडवाणी ने बताया कि, अवार्ड का सर्मपण आज हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में महामण्डलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन एवं नगर विकास न्यास के सचिव ललित गोयल द्वारा संस्था के संरक्षक निम्बार्क आश्रम के महंत मोहन शरण शास्त्री, प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद शर्मा, प्रदेश महासचिव डॉ. कृष्ण गोपाल जांगिड एवं पदाधिकारियों को सर्मपण किया। इस अवसर पर महामण्डलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने केंद्र व राज्य सरकार से संस्कृत भाषा को कक्षा प्रथम से अनिवार्य अध्ययन अध्यापन की पुरजोर मांग की। हमारे देश की संस्कृति का बच्चों को ज्ञान होगा। सचिव ललित गोयल ने वेदाध्ययन एवं संस्कृति को जानने हेतु संस्कृत भाषा के अध्ययन को आवश्यक बताते हुए संस्था को हरसंभव सहयोग करने का भरोसा दिया। इससे पूर्व संस्था के मार्गदर्शक केसरसिंह चौधरी, जयकिशन सीलक, रामपाल कींजा ने अतिथियों का स्वागत अभिनन्दन किया। समर्पण कार्यक्रम में संत मयाराम, रमेश कर्कीजा, महावीर कींजा, मधूसदन आमेरिया, ओमप्रकाश पालड़िया, भगवती लाल शर्मा, रामचन्द्र जाट, प्रभूलाल धामू एवं राजेन्द्र धनेरवा आदि पदाधिकारियों ने भाग लिया।

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