*‼️हे महान पत्रकार रवीश कुमार! क्या तुम पत्रकार और दलालों के बीच का अंतर नहीं समझते???‼️*🤨
_*बाज़ार में होने का मतलब बिकाऊ सामान नहीं होता!*_❌
_*वसुंधरा राजे पर टिप्पणी से पहले उनको समझने की कोशिश तो करो!*_🙋♂️
*✒️सुरेन्द्र चतुर्वेदी*
*देश के एक बहुत बड़े पत्रकार हैं रवीश कुमार। बड़े इसलिए कि उनकी बात लाखों लोग सुनते हैं । पसन्द करते हैं। गोदी मीडिया से उनकी दूरी जग ज़ाहिर है। यह भी ज़ाहिर है कि उनकी साफ़गोई से परेशान एन डी टी वी ने उनको चैनल से निकाल दिया था। अब वे अपना निजी यू ट्यूब चैनल चला रहे हैं। उनके बड़ी संख्या में फोलोवर्स हैं।*👍
*जहां तक सम्मान का है मैं ख़ुद भी उनका बहुत सम्मान करता हूँ मगर पिछले कई दिनों से मुझे लग रहा है कि वह भी व्यवसायिक पत्रकारिता से जुड़ते जा रहे हैं। टी आर पी बढ़ा कर कमाई अर्जित करने का चस्का उनकी ज़ुबान को भी लग गया है। वह भी अपनी पोस्ट में “ख़बर फ्राई” करने लगे हैं।दाल तड़का! दाल मक्खनी!सब उनकी पोस्ट पर नज़र आने लगा है। सच्चाई के साथ झूठ का तड़का लगाने का हुनर उनको पहले नहीं आता था मगर आज कल तो वह इस हुनर को सीख कर कमाल का प्रस्तुतिकरण कर रहे हैं।*👌
*हाल ही उनकी एक पोस्ट इसलिए खोल ली कि उसका हेडिंग था “वसुंधरा राजे ने की कांग्रेस जॉइन”*🫢
*आप सोच सकते हैं की हेडिंग देख कर देखने वाला चौंक कर रुक जाएगा और क्यों कि कार्यक्रम रवीश कुमार जैसे सुलझे हुए पत्रकार का है इसलिए हेडिंग को सच मानते हुए उसे सुनना भी चाहेगा। वसुंधरा ने कांग्रेस पार्टी जॉइन कर ली यह आश्चर्यजनक ख़बर कौन नहीं जानना चाहेगा मगर जब पूरा कार्यक्रम देखा तो पता चला कि रवीश कुमार ने इस चौंकाने वाली ख़बर का कहीं ख़ुलासा नहीं किया। बस! वसुंधरा जी की सियासती परेशानियों पर टिप्पणी दोहराईं! पार्टी के नेताओं की नीतियों की निंदा की! पार्टी बदलने की ज़रूरतों की जुगाली की! संभावनाओं का ज़िक्र किया और बात आई गई कर दी। उनके हेडिंग का मतलब यही निकला कि लोगों को अपने से जोड़ने के लिए उन्होंने भी बाज़ारू मक्कारी दिखा दी।*🤷♂️
*कम से कम मुझे रवीश कुमार जैसे सम्मानित पत्रकार से यह उम्मीद नहीं थी। ऐसा कुकृत्य तो हम जैसे छोटे पत्रकार भी नहीं करते।*❌
*वसुंधरा राजे राजस्थान की बहुआयामी प्रतिभा की वो नेता हैं जिनकी लोकप्रियता उस समय भी सातवें आसमान पर है जब उनको सत्त्ता छोड़े लंबा अरसा हो गया है।*🙋♂️
*रवीश कुमार की यह बात तो सही है कि वसुंधरा के साथ आज भी 40 से ज़ियादा विधायक और दर्जन भर सांसद हैं । उनका यह कहना भी सही है कि दिल्ली और राजस्थान की सियासत में उनकी सहभागिता को स्वीकारा नहीं जा रहा। मगर मैं उनकी इस बात से सहमत नहीं कि वसुंधरा जी भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो जाएंगी। ये दावे के साथ मैं इसलिए नहीं कह रहा कि पिछले दिनों वह सार्वजनिक रूप से यह कह चुकी हैं कि भाजपा के साथ वह दगा नहीं करेंगी। चाहे जो हो पार्टी में ही अंतिम साँस तक रहेंगी! बल्कि इसलिए कह रहा हूँ कि उनको में विगत 50 साल से जानता हूँ। वह तो यहाँ तक कह चुकी हैं कि उनकी अर्थी भाजपा से ही निकलेगी।💯*
*दोस्तों! वसुंधरा राजे की मिट्टी में वफ़ादारी कूट कूट कर भरी हुई है। वह दोस्ती और दुश्मनी दोनों के अदब जानती हैं। धोखा उनको दिया जाता रहेगा मगर वह किसी को धोखा नहीं देंगी । यह तय है। वह सत्ता में रहें या न रहें उनके चाहने वाले हमेशा उनके लिए जान क़ुर्बान करने को उद्धत रहेंगे।*👍
*यहाँ अपनी बात सिद्ध करने के लिए उनसे जुड़े दो लोगों का नाम लेना चाहूँगा। दोनों व्यक्ति उनके साथ तीस सालों से हैं। पहले हैं धीरेंद्र कमठान और दूसरे हैं महेंद्र भारद्वाज! इन दोनों लोगों ने उनका साथ सत्ता काल की बहारों में भी दिया और अपमान जनक मोड़ों पर मिले पतझरों में भी।*🙋♂️
*दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओ एस डी लोकेश शर्मा को भी देखिए जिन्होंने सत्ताकाल में गहलोत के साथ बादाम का हलवा खाया और सत्ता के जाते ही उल्टियां करनी शुरू कर दीं। उनके दस्तों का रंग दुनिया ने देख लिया।*💁♂️
*वसुंधरा को लाख अपमान के घूँट पीने पड़े हों मगर भगवान शंकर की तरह वह नील कंठी बनी रहीं। आज भी भले ही सत्ताधीशों को उनकी ज़रूरत न हो मगर सत्ता की भूख में उनको तलवे चाटते नहीं देखा जा सकता। वह जो हैं जितनी हैं और जहाँ हैं बड़ी शान से हैं। उनका सियासती ठसका कोई ख़त्म नहीं कर पाया। आज के पर्ची युग में भी उनकी आन बान और शान में कोई कमी नहीं आई न आएगी। तो हे पत्रकार स्वयम्भू रवीश कुमार! आपसे यही आग्रह है कि अपनी छवि को बाज़ारू न बनाओ! माना बाज़ार में हो। मगर तवायफ़ों से बाज़ारों के अदब सीखो। दलाल तो नहीं होते पत्रकार ! बस इतना जान लो!*🤨


