राजस्थानी भाषा के कवि एवं साहित्यकार
कैलाश मण्डेला होंगे कोलकाता में सम्मानित
✍️ *मोनू एस.छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
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शाहपुरा, 3 सितंबर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके शाहपुरा के जाने-माने कवि, लेखक, साहित्यकार, अनुवादक एवं मंच संचालक डॉ.कैलाश मण्डेला को कोलकाता की प्रतिष्ठित संस्था ‘मरुधरा’ के वार्षिक समारोह में 17 सितम्बर को सम्मानित कर अलंकरण प्रदान किए जाएंगे। विगत 39 वर्ष से सक्रिय इस संस्था द्वारा प्रतिवर्ष कला एवं साहित्य जगत से एक-एक विभूति को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित व पुरस्कृत किया जाता है। इस वर्ष साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु श्री मण्डेला का चयन किया गया है। केन्द्रीय साहित्य अकादमी तथा राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर से पुरस्कृत कवि मण्डेला का रचना कर्म पद्य एवं गद्य की विवध विधाओं में है जो शोध का विषय है। राजस्थानी भाषा के साथ-साथ हिंदी भाषा में भी सतत एवं समानांतर लेखन से देश-विदेश में अपनी व्यापक पहचान बना चुके श्री मण्डेला की कईं कृतियां पुरस्कृत एवं सम्मानित हो चुकी है। मंच पर अपनी श्रेष्ठ प्रस्तुति के साथ ही उनका प्रकाशित साहित्य भी उच्च स्तरीय है। संत तिरुवल्लुवर कृत ‘कुरल काव्य’ का इन्होंने राजस्थानी के 1080 दोहों में अनुवाद किया जिसे केन्द्रीय साहित्य अकादमी ने प्रकाशित किया है। डींगल भाषा के ‘ढोला मारु रा दूहा’ का हिंदी दोहों में अनुवाद राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से हुआ है। हिंदी एवं राजस्थानी गीतों और ग़ज़लों में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले कवि मण्डेला देश- विदेश में अब तक एक हजार से अधिक कवि सम्मेलन कर चुके हैं। सम सामयिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय सरोकारों पर निर्भीकता से कलम चलाने वाले कॉलमिस्ट, प्रखर वक्ता एवं जाने माने शिक्षाविद् डॉ.मण्डेला का रचना कर्म बहुआयामी है। कवि, लेखक और संचालक होने के साथ ही वे अच्छे गायक, वादक और मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं। राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष से जुड़े रह कर विगत चालीस वर्षों से मायड़ भाषा की सेवा में संलग्न रहे हैं। मरुधरा संस्थान के इस चयन से कला एवं साहित्य जगत में हर्ष व्याप्त है। कोलकाता में यह सम्मान समारोह वहां के प्रतिष्ठित सभागार कला मंदिर में आयोजित होगा। मरुधारा सचिव माधुरी बागड़ी तथा अध्यक्षा श्रीमती उषा झुनझुनवाला जी द्वारा प्रेषित पत्रानुसार सम्मान निमित्त नगद राशि तथा अलंकरण आदि प्रदान किए जाएंगे। साहित्य सृजन कला संगम परिवार ने श्री मण्डेला के इस सम्मान को सम्पूर्ण साहित्य जगत का सम्मान बताते हुए हार्दिक शुभकामनाएं दी और इसे जिले का गौरव बताया।


