दस दिवसीय सम्मेद शिखरजी की ऐतिहासिक धार्मिक एवं आध्यात्मिक यात्रा संपन्न।
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गुलाबपुरा (रामकिशन वैष्णव) जैन सोशियल ग्रूप की दस दिवसीय धार्मिक यात्रा हुई सम्पन्न। JITO भीलवाड़ा द्वारा संचालित स्पेशल ट्रेन से आयोजित 10 दिवसीय सम्मेद शिखरजी धार्मिक एवं आध्यात्मिक यात्रा जैन सोशल ग्रुप (JSG) विजयनगर के सहयोग से अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस भव्य यात्रा में विजयनगर 200 एवं आसपास के क्षेत्रों ओर भीलवाड़ा से 800 से अधिक श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। सभी श्रदालुओं का रविवार सुबह श्री सम्भवनाथ मन्दिर में स्वागत किया गया। उपरोक्त
यात्रा का शुभारंभ अयोध्या से हुआ, जहाँ श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम जन्मभूमि, हनुमानगढ़ी एवं सरयू घाट पर गंगा आरती के दिव्य दर्शन किए। इसके पश्चात काशी (वाराणसी) में काशी विश्वनाथ मंदिर एवं नमो घाट पर गंगा आरती का आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किया। इसके बाद श्रद्धालु प्रमुख जैन तीर्थ स्थल सम्मेदशिखरजी पहुँचे, जो 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण स्थल है। इस पावन भूमि पर 20 तीर्थंकरों एवं 11 गणधरों ने कठिन तपस्या कर मोक्ष प्राप्त किया। सभी यात्रियों ने भोमिया जी मंदिर से आशीर्वाद लेकर लगभग 27 किलोमीटर की कठिन पर्वतीय यात्रा पैदल तय करते हुए गौतम टोंक, चंद्रप्रभु टोंक एवं पारसनाथ टोंक के दर्शन किए। यात्रा की विशेष उपलब्धि यह रही कि अधिकांश सदस्यों ने यह कठिन यात्रा पैदल पूर्ण की, जो उनकी आस्था, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक रही। नववर्ष का स्वागत इस यात्रा के दौरान भक्ति एवं उल्लास के साथ किया गया। मुंबई से पधारे प्रसिद्ध भजन गायक धैर्य राठौड़ के सान्निध्य में भजन-भक्ति के मधुर वातावरण ने पूरे समूह को भावविभोर कर दिया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने पावापुरी में भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण स्थल पर जल मंदिर एवं समवशरण मंदिर के दर्शन किए। आगे लछुआड़ में महावीर स्वामी के देशना स्थल, गुनियाजी होते हुए राजगीर पहुँचे, जहाँ विंध्याचल पर्वत, रोपवे से जापानी मंदिर, गर्म व ठंडे पानी के कुंड, नौलखा जैन मंदिर एवं स्वर्ण भंडार के दर्शन किए गए। यात्रा के अंतिम चरण में नालंदा होते हुए कुंडलपुर, भगवान महावीर स्वामी एवं गौतम स्वामी की जन्मस्थली पहुँचे, जहाँ श्वेतांबर एवं दिगंबर जैन मंदिरों के दर्शन कर श्रद्धालु सकुशल विजयनगर लौटे। जैन सोशल ग्रुप विजयनगर के सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि यह यात्रा केवल धार्मिक नहीं बल्कि संस्कृति, अनुशासन, सेवा और सामूहिक एकता का अद्भुत उदाहरण रही।
ग्रुप के अध्यक्ष विकास चोरड़िया ने इस सफल आयोजन के लिए सभी यात्रियों, सहयोगियों एवं व्यवस्थापन टीम का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी यात्राएँ समाज में संस्कार, साधना और समर्पण की भावना को और सुदृढ़ करती हैं।
दस दिवसीय सम्मेद शिखरजी की ऐतिहासिक धार्मिक एवं आध्यात्मिक यात्रा संपन्न।
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