भीलवाड़ा में अनोखी पहल: ‘तप विदाई कार्यक्रम’ के साथ जीवित रखी अलाव तपने की परंपरा
डी सेक्टर आजाद नगर में सहभोज और भजनों के साथ हुआ आयोजन, सामाजिक जुड़ाव और सनातन संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश
✍️ *मोनू सुरेश छीपा।द वॉयस ऑफ राजस्थान 9667171141*
भीलवाड़ा, 5 मार्च। शहर के डी सेक्टर आजाद नगर में सदियों पुरानी ‘तप (अलाव) तपने’ की परंपरा को जीवित रखने के उद्देश्य से गुरुवार को विशेष “तप विदाई कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कॉलोनीवासियों द्वारा आयोजित इस अनूठे कार्यक्रम में सहभोज, भजन-कीर्तन और सामाजिक संवाद के माध्यम से पारंपरिक संस्कृति को सहेजने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के संयोजक महेश मंडोवरा ने बताया कि सर्दियों में तप (अलाव) केवल शरीर को गर्माहट ही नहीं देता, बल्कि मानसिक सुकून और सामाजिक जुड़ाव का भी महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। उन्होंने कहा कि तप अपशिष्ट निस्तारण के माध्यम से प्राकृतिक संरक्षण का संदेश भी देता है। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए कॉलोनीवासी पिछले तीन वर्षों से लगातार इस कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को इस परंपरा से जोड़ा जा सके।
सह-संयोजक एडवोकेट राकेश नुवाल, बनवारीलाल लड्ढा, कैलाशचंद्र जागेटिया और अमित पलोड़ ने बताया कि तप के आसपास बैठकर लोग आपसी मेलजोल बढ़ाते हैं, सनातन संस्कृति पर चर्चा करते हैं तथा पारिवारिक व सामाजिक समस्याओं पर सार्थक संवाद भी होता है। साथ ही यह वातावरण की नमी और कीटाणुओं को कम करने में भी सहायक माना जाता है।
सहभोज के साथ संपन्न हुए इस आयोजन में रतनलाल सोडाणी, रतनलाल मूंदड़ा, नितिन इनाणी, रामपाल काबरा, श्यामसुंदर काकानी, अशोक जागेटिया, महावीर जागेटिया, शिवम काबरा, प्रदीप जागेटिया, पंकज लाहोटी, गोपाललाल शर्मा, पारसमल पीपाड़ा, प्रेमशंकर शर्मा, एडवोकेट विकास शर्मा, संजय सोमानी, अनिल तोतला, अखिल जाजू, आशीष लड्ढा, रामकिशन सेठिया, जगदीश जागेटिया, नवरतन सोनी, दीनदयाल जोशी, कमलकिशोर त्रिपाठी, सुनील अग्रवाल और मुकेश अग्रवाल सहित अनेक लोगों का विशेष सहयोग रहा।
इस अवसर पर मोहल्ले की मातृशक्ति ने भजन प्रस्तुत कर कार्यक्रम में भक्ति और उल्लास का वातावरण बना दिया, जिससे आयोजन और भी यादगार बन गया।
— मोनू सुरेश छीपा



