राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) की बड़ी रैली: शिक्षा मंत्री के क्षेत्र में फूटा शिक्षकों का गुस्सा, पुतला फूंक जताया आक्रोश
रामगंजमंडी (कोटा) / भीलवाड़ा | 18 मई
रिपोर्ट: मोनू सुरेश छीपा (द वॉयस ऑफ राजस्थान)
ग्रीष्मावकाश (गर्मी की छुट्टियों) सहित अन्य अवकाशों में की गई मनमानी कटौती और शिक्षक-शिक्षार्थियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संगठन द्वारा घोषित प्रांतव्यापी आंदोलन के चौथे चरण के तहत आज शिक्षा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र रामगंजमंडी (कोटा) में हजारों शिक्षकों ने जुटकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया और विशाल रैली निकाली। इस आंदोलन में भीलवाड़ा जिले से भी 100 से अधिक शिक्षक शामिल हुए।
📍 भीषण गर्मी में भी सड़कों पर उतरे हजारों शिक्षक, निकाला पुतला दहन जुलूस
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि मुख्य संरक्षक सियाराम शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में राज्यभर से आए हजारों शिक्षकों ने हिस्सा लिया। भीषण गर्मी और उमस की परवाह किए बिना दोपहर 1:00 बजे शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आक्रोश व्यक्त किया।
रैली का मार्ग: जिलाध्यक्ष राजेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, यह विशाल रैली गोवर्धनपुरा माताजी मंदिर से शुरू होकर सरकारी कुआं, माल गोदाम चौराहा, बाजार नंबर 5, अंबेडकर चौराहा और पंचमुखी रोड होते हुए उपखंड कार्यालय (SDM ऑफिस) पहुंची।
शिक्षकों ने रामगंजमंडी के मुख्य बाजारों में शिक्षा मंत्री के पुतले की शव यात्रा निकाली और उपखंड कार्यालय के बाहर पुतला दहन कर मातम मनाया। इसके बाद उपखंड अधिकारी (SDM) श्रीमती चारु (IAS) को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर छुट्टियां बहाल करने की मांग की गई। इस रैली को स्थानीय व्यापारिक और सामाजिक संगठनों का भी भरपूर समर्थन मिला।
🛑 ‘छुट्टियों में कटौती पूरी तरह अमानवीय और अव्यावहारिक’
संगठन के जिला मंत्री महेश मंडोवरा ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा:
”राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों और स्कूलों में संसाधनों की कमी को देखते हुए गर्मियों की छुट्टियों में कटौती करना पूरी तरह से अव्यावहारिक और अमानवीय है। इस तानाशाही के खिलाफ प्रदेश का शिक्षक चुप नहीं बैठेगा।”
रैली से पूर्व गोवर्धनपुरा माताजी मंदिर के पास एक विशाल आम सभा का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 3,000 शिक्षक शामिल हुए। सभा को मुख्य संरक्षक सियाराम शर्मा, सभाध्यक्ष ललित आर पाटीदार और प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संबोधित किया।
📋 शिक्षकों की मुख्य मांगें जिन पर सरकार है मौन:
वक्ताओं ने सभा में शिक्षा विभाग की कई गंभीर विसंगतियों को उजागर किया:
- पदोन्नति (Promotion) पर रोक: शिक्षा मंत्री के उदासीन रवैये के कारण तृतीय श्रेणी शिक्षकों की पिछले कई वर्षों से पदोन्नति नहीं हुई है। गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों में वरिष्ठ अध्यापकों के हजारों पद खाली पड़े हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है।
- स्टाफिंग पैटर्न (समानीकरण) का अभाव: समानीकरण न होने से कम नामांकन वाले स्कूलों में ज्यादा शिक्षक हैं, जबकि अधिक नामांकन वाले हजारों स्कूल महज नाममात्र के शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं।
- तबादला नीति (Transfer Policy): सरकार का ढाई साल का कार्यकाल बीत जाने के बाद भी अभी तक स्पष्ट शिक्षक स्थानांतरण नीति लागू नहीं की गई है।
- दोहरा पदस्थापन: राज्य में हजारों शिक्षकों का दोहरा पदस्थापन है, जो राजकोष पर भारी पड़ने के साथ-साथ विद्यार्थियों के साथ भी अन्याय है।
संगठन के मुख्य संरक्षक सियाराम शर्मा ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते शिक्षकों और छात्र हितों से जुड़ी ये मांगें नहीं मानीं, तो इस आंदोलन को आने वाले दिनों में और अधिक उग्र किया जाएगा।
👥 भीलवाड़ा से इन पदाधिकारियों ने दी उपस्थिति
संगठन के प्रदेश संभाग मंत्री लीलाधर तिवाड़ी ने बताया कि इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए भीलवाड़ा से भारती झा, सुमनलता उपाध्याय, रूबी झा, मचला चौधरी, सत्यनारायण खटीक, समित मुरारी, संतोष जायसवाल, अजय कुमार जैन, विनोद शर्मा, सत्यनारायण ओझा, पीर मोहम्मद, राधेश्याम सुथार समेत 100 से अधिक शिक्षक व शिक्षिकाएं रामगंजमंडी पहुंचे थे।


