भीलवाड़ा की कांचीपुरम सोसायटी में धूमधाम से मना गणगौर महोत्सव, गीत-नृत्य और पारंपरिक सवारी ने मोहा मन
महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी, इसर-गणगौर की सवारी और राजस्थानी लोकगीतों से गूंजा पूरा माहौल
मोनू सुरेश छीपा | द वॉयस ऑफ राजस्थान
भीलवाड़ा। सुहाग और सौभाग्य के पावन पर्व गणगौर पर कांचीपुरम सोसायटी में इस वर्ष आस्था, परंपरा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। चैत्र शुक्ल तृतीया के अवसर पर आयोजित गणगौर महोत्सव में महिलाओं ने पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ भाग लेते हुए सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।
सुबह से ही सोसायटी परिसर में उत्सवी माहौल बन गया था। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने इसर जी और गणगौर माता की आकर्षक सवारी निकाली। ढोल-बाजों की थाप और “गोर गवर गोमती…” जैसे पारंपरिक राजस्थानी लोकगीतों की मधुर गूंज से वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण हो उठा। महिलाओं ने सामूहिक नृत्य और गीतों के माध्यम से अपनी आस्था और परंपरा का सुंदर प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन सरोज कोगटा, रेणु राठी और नीता जैन के नेतृत्व में किया गया, जिनकी सक्रिय भूमिका से आयोजन भव्य और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। आयोजन में महिलाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी ने इसे और भी खास बना दिया।
इस अवसर पर मधु कोगटा, द्रोपदी मानसिंह, रितु अग्रवाल, उषा अग्रवाल, भावना राठी, कृष्णा लड्ढा, अनुष्का मुंद्रा, अनिता विजयवर्गीय, संतोष शर्मा, अल्का झवर, किरण शर्मा, मधुरिमा रस्तोगी, अल्का गोखरू, चित्रा कोठारी सहित कई महिलाओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

अंत में सभी महिलाओं ने एक-दूसरे को गणगौर पर्व की शुभकामनाएं देते हुए अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का भी प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर गया।


