मनुष्य जीवन दुर्लभ, इसे सार्थक बनाना ही सबसे बड़ा धर्म : स्वामी गोविन्द देव गिरी
जीवन प्रबंधन एवं सुखी जीवन के गुर बताए, कहा– सेवा, संवेदना और मर्यादित आचरण से ही मिलता है वास्तविक सुख
भीलवाड़ा, 18 जून। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास अयोध्या के कोषाध्यक्ष एवं श्री कृष्ण जन्मभूमि न्यास मथुरा के उपाध्यक्ष, प्रख्यात धर्मगुरु स्वामी गोविन्द देव गिरी ने कहा कि जीवात्मा को मनुष्य जन्म मिलना अत्यंत दुर्लभ है और यह ईश्वर का सर्वोत्तम उपहार है। इस दुर्लभ जीवन को सार्थक बनाकर आत्मकल्याण करना ही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि “कभी सुख तो कभी दुःख का नाम ही जीवन है, लेकिन जीवन को सही तरीके से जीना सीख लिया जाए तो मानव जन्म सफल हो जाता है।”
तेरापंथ नगर स्थित तेरापंथ सभागार में ए.बी. माहेश्वरी एजुकेशनल ट्रस्ट भीलवाड़ा के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘जीवन प्रबंधन प्रवचनमाला’ के प्रथम दिन गुरुवार रात्रि को श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी गोविन्द देव गिरी ने जीवन प्रबंधन, आत्मविकास और सुखी जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र बताए।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म ही ऐसा अवसर है जिसमें व्यक्ति सद्मार्ग पर चलकर नर से नारायण बनने की क्षमता प्राप्त कर सकता है। जीवन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपने शरीर, बुद्धि और समय का उपयोग किस प्रकार करते हैं। प्रत्येक व्यक्ति सुख की प्राप्ति के लिए प्रयास करता है, लेकिन वास्तविक सुख का स्रोत बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि हमारे विचारों और आचरण में निहित है।
स्वामीजी ने आत्मचिंतन को जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन स्वयं से पूछना चाहिए कि उसके आचरण में क्या अच्छा रहा और क्या गलत। यदि व्यक्ति अपनी अच्छाइयों को बढ़ाता और गलतियों को कम करता जाए तो वह इसी जीवन में महानता प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने चार पुरुषार्थों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अर्थ आवश्यक है, लेकिन मानवीय मूल्य उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। परिवार, संस्कार और सदाचार को संभाल लिया जाए तो सुख स्वयं जीवन में प्रवेश कर जाता है। सेवा, संवेदना और सहानुभूति को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ जीवन प्रबंधन ही सुखी जीवन का आधार है।
स्वामी गोविन्द देव गिरी ने कहा कि व्यक्ति का आहार, विहार और आचरण उत्तम होना चाहिए। उत्तम स्वास्थ्य सबसे बड़ा लाभ है और विवेकपूर्ण, मर्यादित जीवनशैली सफलता एवं सुख के द्वार खोलती है। मर्यादाहीन जीवन व्यक्ति को कभी स्थायी सुख नहीं दे सकता।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन आयोजक सोमानी परिवार के जगदीशप्रसाद सोमानी, नवनीत सोमानी एवं श्लोक सोमानी द्वारा किया गया।
स्वामी गोविन्द देव गिरी का स्वागत श्यामसुन्दर सोमानी, सत्यनारायण नुवाल, श्यामलाल मूंदड़ा, मोहनलाल छापरवाल, कैलाशचन्द्र बाहेती, नरेश माहेश्वरी एवं साकेत अग्रवाल ने किया। जयपुर से पधारे अशोक कालानी एवं संदीप झंवर ने भी स्वामीजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्रवचनमाला का संचालन पंडित अशोक व्यास ने किया। आयोजन में जीवन प्रबंधन कार्यसमिति के सदस्य, भारत विकास परिषद के पदाधिकारी, उद्योगपति, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पत्रकार एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धर्मगुरु स्वामी गोविन्द देव गिरी दो दिवसीय प्रवचनमाला के दूसरे दिन शुक्रवार रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक श्रद्धालुओं को जीवन प्रबंधन एवं आध्यात्मिक उन्नयन पर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
— मोनू सुरेश छीपा
द वॉयस ऑफ राजस्थान
