राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों पर रोक हटाने की मांग तेज, सरकार तुरंत लागू करे पारदर्शी ट्रांसफर नीति: सत्यनारायण अग्रवाल

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राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों पर रोक हटाने की मांग तेज, सरकार तुरंत लागू करे पारदर्शी ट्रांसफर नीति: सत्यनारायण अग्रवाल


राज्य सरकार पर चुनावी वादा पूरा करने का दबाव, शिक्षक नेता बोले- लाखों शिक्षक मानसिक तनाव से जूझ रहे


गुलाबपुरा (रामकिशन वैष्णव)। राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण अग्रवाल ने प्रदेश में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों पर लंबे समय से लगी रोक को लेकर राज्य सरकार की तबादला नीति पर नाराजगी जताई है। उन्होंने सरकार से तत्काल प्रभाव से पारदर्शी तबादला नीति लागू करते हुए तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण पर लगी रोक हटाने तथा चुनावी वादा पूरा करने की मांग की है।


अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश के लाखों तृतीय श्रेणी शिक्षक वर्षों से तबादलों की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अब उनके धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां व्याख्याताओं एवं द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के समायोजन और तबादले लगातार किए जा रहे हैं, वहीं तृतीय श्रेणी शिक्षकों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे शिक्षकों में असंतोष और निराशा बढ़ रही है।


उन्होंने कहा कि प्रदेश के डार्क जोन और सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्षों से कार्यरत महिला एवं पुरुष शिक्षक पारिवारिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। अनेक शिक्षक अपने गृह जिले और परिवार से दूर रहकर सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी जायज मांगों पर सरकार और प्रशासन ध्यान नहीं दे रहे हैं।


वरिष्ठ शिक्षक नेता ने कहा कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और मानसिक तनाव से जूझ रहे शिक्षकों से बेहतर परिणाम की अपेक्षा करना उचित नहीं है। तृतीय श्रेणी शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो सरकारी योजनाओं और शिक्षण कार्यों को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करते हैं। इसके बावजूद लंबे समय से उनके तबादलों पर प्रतिबंध बना हुआ है।


अग्रवाल ने सरकार से मांग की कि बीच सत्र में तबादले करने के बजाय वर्तमान समय में ही स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि नए शैक्षणिक सत्र में विद्यालयों में शिक्षकों का संतुलित नियोजन हो सके। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते तबादले किए जाते हैं तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।


उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो शिक्षकों में बढ़ता असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। साथ ही सरकार से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के हित में सकारात्मक निर्णय लेकर उनकी वर्षों पुरानी मांग को पूरा करने की अपील की।


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